पहले इंजन एक ही तरफ चलता था। इसलिए इंजन को घुमाने के लिए इस तकनीक का इस्तेमाल किया गया। लेकिन अब इंजन दोनों तरफ घुमते हैं, लिहाजा इसकी जरूरत अब नहीं पड़ती है।
घुमाने में लगता है 25 मिनट, चार रेलकर्मी लगते हैं
हैंडल से सैलून या इंजन घुमाने में 25 मिनट का समय लगता है। चार से पांच रेलकर्मी इसमें लगाए जाते हैं। हैंडिल घुमाने में काफी ताकत लगानी पड़ती है। इसे घुमाते हुए देखना भी काफी रोमांचकारी है। जब इसे घुमाया जाता है तो अजीब सी आवाज आती है।
सप्ताह में दो से तीन बार घुमाई जाती हैं बोगियां
कोचिंग डिपो में स्थित टर्न टेबल पर सप्ताह में दो से तीन बार ऐसा होता है जब बोगियों को घुमाया जाता है तो कुछ अलग सी आवाज होती जिसे देखना ही रोमांच पैदा करता है।