गोरखपुर। बीमारी के उपचार से बेहतर उपाय बचाव को माना जाता है और बचाव के लिए सबसे प्रभावी माध्यम टीकाकरण ही है। शनिवार 16 मार्च को राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस यह याद दिलाने के लिए है कि किस तरह से टीकाकरण ने हमारे देश में गर्भ से लेकर बढ़ते बच्चों तक की जान बचाने में अहम रोल निभाया है। बात करें अगर गोरखपुर-बस्ती मंडल की तो यहां इंसेफेलाइटिस के कहर को रोकने में टीका ही सबसे कारगर हथियार बना।
नियमित टीकाकरण के प्रति उदासीन परिवारों को जागरूक कर इसके फायदे बताने में यूनिसेफ संस्था समेत कई अन्य संगठन भी सक्रिय हैं। कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (सीएचओ) शत्रुध्न कुमार भी उदासीन परिवारों के बीच जाकर उनका भ्रम दूर करते हैं और बच्चों का टीकाकरण करवाते हैं । शत्रुघ्न बताते हैं कि पहले लोग टीकाकरण से बचने के तमाम बहाने बनाते थे, लेकिन अब उन्हें इसका महत्व समझ में आने लगा है। डेरवा ब्लॉक के दुबौली गांव की चर्चा करते हुए कहते हैं कि यहां एक परिवार में साढ़े तीन साल की उम्र तक दो बच्चों को एक भी टीका नहीं लगा था। इन्हें समझाया गया कि कैसे टीका लगने से बच्चों का जानलेवा बीमारियों से बचाव होता है। इसके बाद यह परिवार टीकाकरण को तैयार हुआ। इंसेफेलाइटिस की बात करें तो आंकड़े बताते हैं कि एईस रोगियों में वर्ष 2017 की तुलना में वर्ष 2022 में 84 फीसदी की कमी और मृतकों की संख्या में 97 फीसदी की कमी आई है। इसी तरह जेई रोगियों में वर्ष 2017 की तुलना में वर्ष 2022 में 87 फीसदी और मृतकों की संख्या में 98 फीसदी की कमी आई है।
इंसेफेलाइटिस और कोविड हैं उदाहरण
बच्चों से लेकर बड़ों तक में टीकाकरण कितना लाभप्रद है, पूर्वांचल में इसका सबसे ज्वलंत उदाहरण टीकाकरण ही है। आरएमआरसी के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अशोक पांडेय अपने अनुभव साझा करते हुए कहते हैं कि वर्ष 2004-05 का दौर ऐसा था, जब अस्पतालों में बेड नहीं मिलते थे। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के चाइल्ड वार्ड के बाहर जून से लेकर सितंबर तक केवल सिसकियां और चीखें सुनाई देती थीं। लेकिन जब इंसेफेलाइटिस का टीकाकरण शुरू हुआ तो यह बीमारी काबू में आने लगी। अब नतीजा सबके सामने है। इसे वह कोविड से भी जोड़ते हुए कहते हैं कि एक बार ऐसा लगा था कि वायरस काबू में नहीं आएगा, लेकिन टीके की वजह से हालत तेजी से नियंत्रित हुई।
अब यूविन पर होगा पंजीकरण
सीएमओ डॉ. आशुतोष कुमार दूबे ने बताया कि बच्चे के जन्म से पांच साल की आयु तक सात बार नियमित टीकाकरण आवश्यक है। अब यूविन पोर्टल पर इसके लिए पंजीकरण हो रहा है। इसका फायदा यह है कि अगर कोई परिवार गोरखपुर से रोजगार के लिए मुंबई चला गया तो वहां अपना आधार नंबर बताकर टीकाकरण करा सकता है। टीकाकरण के लिए आधार नंबर और आधार से लिंक मोबाइल नंबर केंद्र पर साथ ले जाना अनिवार्य है। बच्चों की जान बचाने में टीकाकरण सबसे कारगर उपाय है।
गोरखपुर में एईएस और जेई की स्थिति
वर्ष मरीजों की संख्या मृतकों की संख्या
2018 435 40
2019 262 15
2020 227 13
2021 240 15
2022 96 3
सितंबर-22 50 1
13 सितंबर-23 47 0
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गोरखपुर में सिर्फ जेई पॉजिटिव
वर्ष मरीजों की संख्या मृतकों की संख्या
2018 35 2
2019 35 5
2020 13 2
2021 12 0
2022 11 0
सितंबर-22 9 0
13 सितंबर-23 0 0