जेमिनी पैराडाइज परिसर को पहले ही रेड जोन घोषित किया जा चुका है। वहीं, बेलघाट के रहने वाला 30 वर्षीय युवक 11 मई को हरियाणा से आया था। उसी क्षेत्र की रहने वाली 52 वर्षीय महिला आठ जून को मुंबई से आई थी। बेलघाट के ही 22 वर्षीय युवक छह जून को गुजरात से आया था। जबकि उसी क्षेत्र का 65 वर्षीय बुजुर्ग 20 मई को दिल्ली से आया था।
इनके अलावा भटहट की रहने वाली 14 वर्षीय किशोरी नौ जून को नोयडा से आई थी। भटहट का रहने वाला 11 साल का बालक परिजनों के साथ पांच जून को मुंबई से आया था। जबकि भटहट का रहने वाला एक दपंति सात जून को दिल्ली से आया था। इनकी उम्र 47 और 49 साल है।
इन आठों के नमूने पूल टेस्टिंग से लिए गए थे। सभी की रिपोर्ट मंगलवार को पॉजिटिव आई है। इनमें सात लोगों को इलाज के लिए रेलवे अस्पताल में शिफ्ट कर दिया गया है। जबकि बेलघाट के 65 वर्षीय बुजुर्ग को बीआरडी मेडिकल कॉलेज के कोरोना वार्ड में भर्ती कराया गया है।
सीएमओ डॉ श्रीकांत तिवारी ने बताया कि जो लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। उनके परिजनों के नमूने लिए जाएंगे। उनके संपर्क में आने वाले लोगों की तलाश भी शुरू कर दी गई है। गांव में सैनिटाइज कराने के निर्देश दिए गए हैं। गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीम बुधवार से लोगों के सेहत की जांच भी करेगी। जिनकी ट्रैवेल हिस्ट्री होगी, उनकी भी जांच कराई जाएगी।
सीएमओ ने बताया कि 19 से फिर से पूल टेस्टिंग शुरू कर दी जाएगी। 18 जून तक पूल टेस्टिंग पर शासन की ओर से रोक लगाई गई है। पूल टेस्टिंग में पहले उनका नमूना लिया जाएगा, जिनकी ट्रैवेल हिस्ट्री होगी।
पांच जूनियर डॉक्टरों की रिपोर्ट निगेटिव, हॉस्टल में हुए शिफ्ट
बीआरडी प्राचार्य डॉ गणेश कुमार ने बताया कि मेडिकल कॉलेज के पांच जूनियर डॉक्टरों की पहली रिपोर्ट निगेटिव आई है। इसके बाद उन्हें हॉस्टल में शिफ्ट कर दिया गया है। डॉक्टरों की सेहत में तेजी से सुधार हो रहा है। चिंता की अब कोई बात नहीं है। बता दें कि अब तक बीआरडी के 10 डॉक्टर और चार स्टाफ नर्स पॉजिटिव मिल चुके हैं। इनमें पांच की रिपोर्ट निगेटिव आई है।
21 दिन बाद बहरामपुर और मंझरिया से हटा प्रतिबंध
गोरखपुर। कोरोना संक्रमित मिलने की वजह से सदर तहसील क्षेत्र के बहरामपुर सतुहडिया और मंझरिया गांव को सील कर दिया गया था। 21 दिन बाद अब यहां से प्रतिबंध हटा लिए गए है। अब दूसरे इलाकों की तरह यहां के भी लोग रात नौ बजे तक कहीं भी आ जा सकेंगे। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट गौरव सिंह सोगरवाल ने बताया कि इन गांवों को 29 मई को सील किया गया था। 21 दिन के भीतर वहां कोई दूसरा कोरोना पॉजीटिव नहीं पाया गया जिससे दोनों गांव से प्रतिबंध हटा दिया गया है।