आरडीएफ में उपभोक्ताओं के बिल पर गलत बिलिंग हो जाती है। यह गलत बिलिंग दो तरह से होती है। यह बिल उपभोक्ताओं और निगम, दोनों की गलती से होता है। इसमें या तो उपभोक्ता के द्वारा ही गलत रीडिंग बताई जाती है या तो बिलिंग कंपनी के कर्मचारी गलत रीडिंग दर्ज कर बिल बना देते हैं। ऐसी स्थिति में अक्सर आरडीएफ बिल बन जाता है।
क्या होता ही सीडीएफ
इसमें कंपनी के कर्मचारी घर बैठे बिलिंग से उपभोक्ताओं को भारी भरकम बिल बनाकर भेज रहे हैं। नतीजतन सीडीएफ (सीलिंग डिफेक्टिव) या आईडीएफ (आईडेंटीफाइढ डिफेक्टिव) बिल बन जाते हैं।