गोरखपुर। एक यूनिट रक्त से चार लोगों की जान बचाई जा सकती है। 18 से 65 साल का हर स्वस्थ व्यक्ति रक्तदान कर सकता है। इससे शरीर को किसी प्रकार का नुकसान नहीं होता, बल्कि इससे शरीर को फायदा ही पहुंचता है। इसलिए 14 जून को विश्व रक्तदाता दिवस के अवसर पर सुबह 10 बजे से दोपहर एक बजे तक जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज के ब्लड बैंक में पहुंचकर आप भी रक्तदान करें और महादानी बनें।
अमर उजाला फाउंडेशन की तरफ से हर वर्ष विश्व रक्तदाता दिवस के अवसर पर रक्तदान शिविर का आयोजन किया जाता है। इस बार भी सुबह 10 बजे से दोपहर एक बजे तक रक्तदान शिविर का आयोजन होगा।
गर्मी से न घबराएं, नहीं होगी दिक्कत
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. रामकुमार जायसवाल ने बताया कि गर्मी की वजह से रक्तदान करने वालों को कोई असर नहीं होगा। रक्तदाता ब्लड बैंक में आधा घंटे पहले पहुंचे और विश्राम के उपरांत अपना पंजीकरण व जांच कराएं। इसके बाद रक्तदान करें। रक्तदान के बाद आधा घंटे तक वहीं विश्राम करें। इस दौरान अगर किसी प्रकार की दिक्कत आती है तो वहां मौजूद मेडिकल टीम सहायता करेगी।
रक्तदान के बारे में ये भी जाने
एक यूनिट में 350 मिलीग्राम खून निकाला जाता है। रक्तदान के बाद खून की कमी 24 घंटे में पूरी हो जाती है। एक यूनिट खून से एक यूनिट प्लाज्मा, एक यूनिट प्लेटलेट्स, एक यूनिट आरबीसी और एक यूनिट क्रायो मिलता है। इन चारों से अलग-अलग चार लोगों का जीवन बचाया जा सकता है। तीन महीने के अंतराल पर ही दोबारा रक्तदान करना चाहिए। रक्तदाता की उम्र 18 से 65 साल के बीच हो, शरीर का वजन न्यूनतम 45 किलो होना चाहिए।
अब तक 81 बार रक्तदान कर चुके हैं डॉ. रूप कुमार बनर्जी
शहर के प्रमुख चिकित्सकों में शामिल डॉ. रूप कुमार बनर्जी अब तक 81 बार रक्तदान कर चुके हैं। 18 साल की उम्र में रक्तदान के फायदे जानने के बाद इन्होंने साल में दो बार रक्तदान का नियम बना लिया। अब 61 साल की उम्र में भी पूरी तरह से फिट हैं और रक्तदान के लिए तैयार हैं। डॉ. बनर्जी ने कहा कि हर स्वस्थ व्यक्ति को रक्तदान जरूर करना चाहिए।
सामाजिक कार्यकर्ता अशोक मिश्र भी अब तक 51 बार रक्तदान कर चुके हैं। जटेपुर उत्तरी के रहने वाले अशोक मिश्र बताते हैं कि बहुत पहले सड़क पर घायल पड़े एक व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाया। अगले दिन उसे दो यूनिट ब्लड की जरूरत थी, जिसमें पहला यूनिट मैंने दिया। उस व्यक्ति के स्वस्थ होने से जो असीम खुशी मिली, वैसी खुशी कोई और नहीं हो सकती। इसलिए अब हर साल दो बार रक्तदान जरूर करता हूं।