विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के सदस्यों ने मांग की है कि उन्हें फ्रंटलाइन वर्कर का दर्जा मिले। अगर बिजली निगम ऐसा नहीं करता है तो कर्मचारी दो जून को सिर्फ बिजली आपूर्ति करेंगे, बाकी कामों को वे छोड़ देंगे।
कर्मियों और संविदा श्रमिकों को फ्रंटलाइन वर्कर घोषित किए जाने की मांग लंबे समय से की जा रही है। अधिकारियों व कर्मचारियों का कहना है कि दिन-रात हम सभी बेहतर निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए संकल्पित रहते हैं। कोविड से बिना परहेज किए हमारी टीम लगातार फाल्ट और निर्बाध आपूर्ति चलती रहे प्रयास करते हैं।
सरकार से हमेशा हम मांग कर रहे हैं कि ऐसे में हमारी भी फिक्र करते हुए फ्रंटलाइन वर्कर घोषित करें। लेकिन यह नहीं हो सका है। कर्मचारियों ने बताया कि बीते दिनों रात में आंधी बारिश के बीच भी ऑक्सीजन प्लांट पर किसी तरह से बिजली संकट न आए, सभी ने मिलकर काम किया। अनिवार्य रूप से अस्पतालों और ऑक्सीजन प्लांट की बिजली को प्रभावी रखने का हर संभव प्रयास किया गया।
हमें भी अन्य स्टाफों की तरफ से दे अनिवार्यता
सचिव अभियंता संघ ऐश्वर्य सिंह ने बताया कि बिजली निगम की तरफ से लगातार सभी कर्मचारी व अभियंता अपना पूरा प्रयास कर, कोविड महामारी में अस्पतालों और ऑक्सीजन प्लांट की बिजली को बहाल रखने का प्रयास कर रहे हैं। साथ ही घरेलू उपभोक्ताओं की समस्याओं को भी तत्काल वरीयता देते हुए उन्हें हल करने का प्रयास करते हैं। जिससे कोरोना कर्फ्यू में लोगों को बिजली संकट से न जूझना पड़े। हमें भी सरकार फ्रंटलाइन वर्कर घोषित करें।
अध्यक्ष विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति बृजेश त्रिपाठी ने बताया कि अभियंताओं, कर्मचारियों एवं उनके परिजनों के बड़ी संख्या में कोरोना वायरस से संक्रमित होने तथा तमाम साथियों के बिछड़ जाने से सभी चिंतित हैं। निर्बाध विद्युत आपूर्ति के लिए अभियंताओं एवं कर्मचारियों को ज्यादातर समय फील्ड में रहना होता है। ऐसे में सभी की सुरक्षा व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए जाए। सरकार हमें भी फ्रंटलाइन वर्कर घोषित करे।
अध्यक्ष अवर अभियंता संगठन शशि कपूर ने बताया कि सभी बिजली कर्मियों को सर्वोच्च प्राथमिकता पर वैक्सीन लगाई जाए। कोरोना संक्रमण से मृत कर्मियों के परिजनों को आर्थिक मुआवजा भुगतान सुनिश्चित किया जाए। मृत कर्मियों के आश्रितों को उनकी योग्यतानुसार नौकरी दी जाए। हमारे विभाग में लगभग 16 कर्मचारी-अधिकारी की कोरोना की वजह से मौत हो चुकी है। सरकार हमारी मांगों को पूरा करें और फ्रंटलाइन वर्कर घोषित करे।
विद्युत कर्मचारी मोर्चा क्षेत्रीय सचिव उदय सिंह ने बताया कि कोरोना संक्रमण से मरे अभियंताओं व कर्मचारियों को सरकार द्वारा घोषित आर्थिक लाभ की सहायता तत्काल दी जाए। वर्तमान कोरोना संकटकाल में, जब प्रत्येक व्यक्ति जीवन के लिए संघर्ष कर रहा है, उसके बाद भी उनके परिवार वालों को कुछ भी नहीं मिल रहा है। फील्ड में बिजली निगम से जुड़े कामों को करने के दौरान अक्सर अधिकारी-कर्मचारी सीधे सबसे पहले संक्रमित मरीज से मिलते हैं।
विद्युत कर्मचारी मोर्चा पूर्वांचल सचिव अरविंद मिश्रा ने बताया कि ऊर्जा निगमों के तमाम बिजली कर्मचारियों, जूनियर इंजीनियरों, अभियंताओं और संविदा श्रमिकों को तत्काल फ्रंटलाइन वर्कर घोषित कर मृत कर्मियों के परिजनों को जल्द से जल्द 50-50 लाख रुपये के मुआवजे का भुगतान सुनिश्चित किया जाए। मृत कर्मियों के आश्रितों को उनकी योग्यतानुसार नौकरी दी जाए तथा प्राथमिकता के आधार पर उनका कोविड-19 टीकाकरण किया जाए।
अध्यक्ष विद्युत मजदूर संगठन अजय शाही ने बताया कि कोरोना संक्रमण की दूसरी मारक लहर के बीच बिजलीकर्मी अस्पतालों और आम लोगों को निर्बाध 24 घंटे बिजली आपूर्ति करने में प्राणप्रण से जुटे हैं। अपने दायित्व का निर्वाह करते हुए कोरोना से कई कर्मियों की मृत्यु हो चुकी है और सैकड़ों बिजलीकर्मी, संविदा श्रमिक और उनके परिवारवाल संक्रमित हैं। ऐसे में सरकार राहत देते हुए तत्काल प्रभाव से सभी को फ्रंटलाइन वर्कर घोषित कर दें।