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इस वजह से 1500 लोगों को नहीं मिल रही थी बिजली की आपूर्ति, अब ये विभाग लगाएंगे कनेक्शन

Sat, 06 Jun 2020 11:45 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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लॉकडाउन के पहले ऊर्जा मंत्री से जनप्रतिनिधियों की वीडियो कांफ्रेंसिंग में हुई वार्ता के बाद अब ग्रामीणांचल के 186 मजरों के लगभग 1500 परिवारों को बिजली नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। ऊर्जा निगम के साथ एलएंडटी की टीम मिलकर कनेक्शन लगाने का काम करेगी।

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कई ग्रामीणों ने गांव के बीच से निकल कर अपना मकान खेत में बनवा लिया है। इसकी वजह से कनेक्शन लेने के बाद भी उन्हें बिजली की आपूर्ति नहीं हो पा रही थी। दरअसल, ऊर्जा मंत्री के वीडियो कांफ्रेंसिंग के बाद बिजली निगम की तरफ से मुख्य अभियंता को विधायकों, सांसदों के क्षेत्र में बिजली संबंधी समस्याएं जानने के लिए पत्र लिखा गया था।

इसके बाद मुख्य अभियंता ने इसकी जिम्मेदारी ग्रामीण वितरण मंडल अधीक्षण अभियंता व सौभाग्य के नोडल अधिकारी राजीव चतुर्वेदी को सौंपी।उन्होंने सात विधानसभाओं के विधायकों के अलावा दो सांसदों से भी संपर्क किया। इसी के बाद नोडल अधिकारी ने कुल 186 मजरों का सर्वे कराकर रिपोर्ट ऊर्जा निगम के पास भेजी थी।
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इन सभी मजरों में सौभाग्य योजना में कनेक्शन तो हो गया है लेकिन घर बदल देने से उनके घरों में आपूर्ति नहीं हो पा रही है। अब अनलॉक में इन सभी मजरों में कनेक्शनों को बिजली नेटवर्क से जोड़ा जाएगा।

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ये हैं मजरें

गोरखपुर ग्रामीण 03, चिल्लूपार 03, चौरीचौरा- 03, खजनी 03, सहजनवां 08, पिपराइच 15, कैंपियरगंज 113,  गोरखपुर सांसद- 05, बांसगांव सांसद 24,

गोरखपुर जोन के 186 मजरों के 1500 घरों को बिजली देने की प्रक्रिया चल रही है। पहले यहां एचटी और एलटी लाइन बिछाएंगे। इसके बाद ट्रांसफार्मर लगाकर आपूर्ति देना शुरू किया जाएगा। राजीव चतुर्वेदी, नोडल सौभाग्य योजना
 
इंडस्ट्री न चलने से विद्युत खपत में 33 प्रतिशत तक गिरावट
गोरखपुर। लॉकडाउन में इंडस्ट्री के नहीं संचालित होने की वजह से विद्युत खपत में 33 प्रतिशत तक की गिरावट आई है। इसका निगम के राजस्व पर भी असर पड़ा और 35 प्रतिशत तक राजस्व घट गया है। कोरोना संक्रमण की रोकथाम के चलते निगम ने डिजिटल भुगतान पर जोर दिया था लेकिन उपभोक्ताओं पर इसका कोई खासा असर नहीं पड़ा।

निगम को अप्रैल, मई में 30 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। इस महीने निगम को 66 करोड़ रुपये राजस्व मिलना था। लेकिन बिजली का कम उपयोग होने से 36 करोड़ रुपये ही जमा हुए हैं। अधीक्षण अभियंता शहरी यूसी वर्मा ने बताया कि बिल जमा करने के लिए सभी काउंटर शुरू कर दिए गए थे।

लेकिन लोग बिजलीघर जाकर बिल जमा कराने के बजाय ऑनलाइन जमा करें तो बेहतर होगा। उन्होंने बताया कि अप्रैल-मई में गर्मी होने के बावजूद बिजली की डिमांड पिछले साल के मुकाबले 33 फीसदी तक कम रही। डिमांड कम होने की मुख्य वजह इंडस्ट्रीज का न चलना भी है।
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