कर्मचारी नेता दीपक गुप्ता ने कहा कि उपभोक्ताओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए विरोध-प्रदर्शन जारी रखेंगे। कर्मचारी नेता ऐश्वर्य सिंह ने कहा कि सरकार जो निर्णय ले रही है, वह संविधान विरोधी है। हमारी मौलिक स्वतंत्रता एवं अधिकारों का हनन हो रहा है। निरंकुश सरकार के खिलाफ सभी विभागों के कर्मचारियों के साथ आम जनता को भी आगे आना होगा। कर्मचारी नेता बृजेश त्रिपाठी ने कहा कि बिजली के निजीकरण का फैसला घातक है। इसका सारा बोझ उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। बिजली महंगी मिलेगी। बिजली अधिकारी व कर्मचारियों का भी अहित होगा।
छह मंडलों में फैला है पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम का दायरा
पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड का दायरा यूपी के छह मंडलों में फैला है। इससे गोरखपुर, बस्ती, आजमगढ़, प्रयागराज, वाराणसी और मिर्जापुर मंडल जुड़े हैं। गोरखपुर शहर में ही 1.85 उपभोक्ता हैं। 800 से ज्यादा कर्मचारी हैं। सभी मंडलों व उनके जिलों को मिला लिया जाए तो कर्मचारियों की संख्या 10 हजार हो जाएगी। सभी मंडलों व जिलों में निजीकरण के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुआ है।
विरोध प्रदर्शन का फेसबुक लाइव
मशाल जुलूस का फेसबुक लाइव भी किया गया। बिजली कर्मियों को डर था कि प्रशासन के विरोध का सामना करना पड़ेगा। लिहाजा, शहर के अलग-अलग हिस्सों से जुलूस निकाला गया। हर जगह से फेसबुक लाइव की व्यवस्था की गई।
गांधी प्रतिमा के समक्ष विरोध प्रदर्शन के दौरान बिजली कर्मियों ने जनता की सुविधा का ख्याल रखा। एक ओर की सड़क को खोले रखा ताकि आवागमन में किसी तरह की दिक्कत न हो सके।
सरकारी नौकरी में संविदा का मुद्दा भी गूंजा
कर्मचारी नेता विजय जायसवाल ने कहा कि सरकारी नौकरी में पांच साल के संविदा की व्यवस्था की बात कही जा रही है। यह घातक है। सरकार उद्योगपतियों के आगे नतमस्तक है। इस नीति का अंतिम दम तक विरोध किया जाएगा।
कर्मचारी नेता बृजेश त्रिपाठी ने कहा कि दूसरे विभाग के सरकारी कर्मचारी भी दुखी हैं। 50 साल की उम्र के बाद व्यक्ति की जिम्मेदारियां बढ़ती हैं। ऐसे में सरकार जबरदस्ती सेवानिवृत्त करना चाहती है। कर्मचारी नेता राहुल श्रीवास्तव ने कहा कि कर्मचारियों के सामने विकट समस्या आई है।
पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के संभावित निजीकरण को लेकर बिजलीकर्मियों का विरोध अब धीरे धीरे उपभोक्ताओं को प्रभावित करेगा। पांच अक्टूबर से अधिकारी कर्मचारियों ने पूरी तरह हड़ताल का फैसला किया है। बस बिजली घर खुले रहेंगे। मतलब साफ है कि पांच अक्टूबर से बिल संबंधी, नए कनेक्शन, मीटर सम्बंधी समस्याओं के समाधान पर ब्रेक लग सकता है।
विद्युत कर्मचारी संघर्ष समिति की तरफ से संभावित निजीकरण का विरोध जताया जा रहा है। अभी तक मुख्य अभियंता कार्यालय मोहद्दीपुर पर एक घंटे का विरोध प्रदर्शन चल रहा था। मंगलवार (29 सितंबर) से प्रदर्शन दोपहर दो बजे से शुरू होकर शाम पांच बजे तक चलेगा। पांच अक्तूबर से सभी प्रकार के विभागीय कॉन्फ्रेंसिंग के साथ काम का भी पूर्ण बहिष्कार किया जाएगा।
इसे लेकर सूचना दे दी गई है। कर्मचारी नेता ऐश्वर्य सिंह ने बताया कि विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से ही चलाया जाएगा। इस प्रदर्शन में जूनियर इंजीनियर, अभियंता, के साथ कर्मचारी विरोध जताएंगे। जरूरत पड़ी तो जेल भरो आंदोलन भी शुरू किया जाएगा।