गोरखपुर जिले में शस्त्र लाइसेंस के लिए किए गए आवेदन में बताई गई वजह गवाही दे रही है कि अधिकतर के लिए असलहा उनकी जरूरत नहीं, बल्कि शौक है। आवेदन करने वाले 8000 लोगों में से अधिकतर ने यही वजह बताई थी कि उनकी जान को खतरा है। इनमें से ज्यादातर आवेदन वर्ष 2018 के हैं। महीनों बाद भी शस्त्र लाइसेंस नहीं बने, लेकिन इनमें से किसी ने ऐसी कोई घटना पुलिस को नहीं बताई है, जिससे यह लगे कि वाकई उनकी जान को खतरा है।
लाइसेंस के लिए तरह-तरह के बहाने
जानकारी के मुताबिक, डीएम कार्यालय से शस्त्र लाइसेंस के लिए फार्म मिलता है। उसका एक सत्यापन पुलिस, एलआईयू से भी होता है। अंत में वह फाइल एसएसपी के पास आती है। पुलिस में फाइल न रुकने पाए, इसके लिए लोग हर जुगत लगाते हैं। जिले के एसएसपी रहे सुनील कुमार गुप्ता ने एक बार यह कह दिया कि किसी को शस्त्र लाइसेंस की जरूरत हो तो बताए। उनका यह कहना था कि आवेदनों की भरमार हो गई।
सभी ने अपनी फाइल में खुद को जान को खतरे की वजह बताई। किसी ने कहा कि वह व्यापारी हैं। रात में आते-जाते हैं। इसलिए खतरा है तो किसी ने यहां तक कह दिया कि बेटी बड़ी हो गई है। अब जबकि, एक भी लाइसेंस नहीं बना, तो इनमें से एक भी ऐसा नहीं आया, जिसने यह कहा हो कि उसके साथ कोई अप्रिय घटना हो गई।