नेपाल में भी बेचते थे वाहन
चोरी के वाहन का नया आरसी बनवाकर ये लोग आसपास के जिलों के अलावा नेपाल में भी बेच दिया करते थे। नेपाल में वाहन बेचने में आसानी होती थी। कीमत ज्यादा मिलने के साथ ही जांच पड़ताल में पकड़े जाने का भी डर नहीं रहता था। पुलिस पूछताछ के आधार पर जांच कर रही है कि कितने वाहनों को इन लोगों ने अब तक बेचा है।
वाहनों का चेसिस नंबर बदल देते थे
गिरोह के सदस्य गाड़ी पकड़ी न जाए, इसके लिए चेसिस नंबर मिटा देते थे। साथ ही नंबर प्लेट को भी बदल देते थे। इससे ये पकड़े नहीं जाते थे।
नया आरसी कैसे जारी होता था, जांच में जुटी पुलिस
गिरोह के पकड़े जाने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर आरटीओ के बाबुओं की मदद से नया आरसी जारी कैसे हो जाता था। क्योंकि चोरी का केस दर्ज होने पर पुलिस की ओर से आरटीओ दफ्तर को वाहन का पूरा डिटेल भेजा जाता है, ताकि वहां पर चोरी की जानकारी हो। इसके बावजूद इसमें सेंधमारी हुई है। पुलिस मामले की तह तक जाने की जांच शुरू कर दी है।