खासकर युवाओं, नौकरीशुदा लोगों की ये धीरे-धीरे पहली पंसद बन रही है। पंत पार्क के बाहर स्थित टीवर्स के नाम से स्टार्ट अप चलाने वाले अवनी त्रिपाठी ने बताया कि उनके स्टाल पर रोजाना 250-300 कप चाय की ब्रिकी होती है। इनमें रोजाना 50 से अधिक कप की डिमांड एडिबल गिलास में की जाती है। इनकी खासियत है कि इनके इस्तेमाल के बाद फेंकने की झंझट नहीं रहती है। जबकि, कुल्हड़ के इस्तेमाल की वजह से गंदगी फैलती है। संवाद
एक महीना पहले से शुरू हुआ एडबिल कप का चयन
चाय का स्टार्टअप चलाने की वजह से रोजाना 250-300 गिलास फेंकने के लिए के लिए जगह की तलाश करनी पड़ती है। फेंकने के बाद भी गंदगी रह जाती है। वहीं इनके निर्माण में मिट्टी का प्रयोग होता है जो मिट्टी की उर्वरा शक्ति को प्रभावित करता है। जिसके बाद सिद्धार्थनगर विश्वविद्यालय के बीएससी द्वितीय वर्ष की छात्रा अवनी ने इंटरनेट पर विकल्प को तलाशा तो उन्हें एडिबल कप नजर आए। इसके बाद उन्होंने इसका इस्तेमाल शुरू किया जो काफी पसंद किया जा रहा है।