गोरखपुर। प्रमुख ट्रेनों के आरक्षित कोच में सीट के लिए मची मारामारी के बीच राहत भरी खबर यह है कि प्रमुख ट्रेनों में भी जल्द ही एसी थर्ड व स्लीपर के कुछ कोच को इकोनॉमी क्लास से बदला जाएगा। एसी थर्ड व स्लीपर के एक कोच में 72 बर्थ होते हैं, जबकि एसी थर्ड में 80 बर्थ। ऐसे में एक कोच में आठ सीटें अतिरिक्त मिलेंगी। इससे वेटिंग टिकट वालों को अधिक संख्या में कंफर्म टिकट मिल सकेगा।
गोरखपुर से चलने वाली वैशाली, बिहार संपर्क क्रांति, सप्तक्रांति, कुशीनगर एक्सप्रेस, दादर एक्सप्रेस, राप्ती सागर एक्सप्रेस में एसी सेकेंड, एसी थर्ड व स्लीपर क्लास में आरक्षित टिकट मिलना मुश्किल होता है। सामान्य सीजन में भी कंफर्म टिकट के लिए आठ से 10 दिन पहले टिकट लेना होता है। इसके बाद भी अंतिम समय तक टिकट कंफर्म होने की उम्मीद नहीं होती है।
वैशाली एक्सप्रेस के लिए तो लोग दो महीने पहले ही बुकिंग शुरू कर देते हैं। वहीं तत्काल टिकट मिलना भी मुश्किल होता है। इसके चलते टिकटों की दलाली का धंधा भी तेज हो गया है। दलाल काउंटर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र के कंप्यूटर सेंटरों पर पर्सनल आईडी से होने वाली टिकट बुकिंग तक में अपनी सेटिंग किए हुए हैं।
दूसरी तरफ काउंटर से वेटिंग टिकट लेकर लोग ट्रेनों के आरक्षित कोच में घुस जाते हैं, जिसके चलते अन्य यात्रियाें को भी दिक्कत होती है। इसको देखते हुए पूर्वोत्तर रेलवे ने भी गोरखपुर स्टेशन वैशाली, बिहार संपर्क क्रांति, सप्तक्रांति, सत्याग्रह समेत कई ट्रेनों की जांच शुरू की है। इस दौरान कोच में वेटिंग टिकट लेकर यात्रा करने वालों को उतारा जा रहा है।
रेलवे ने भी इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए प्रयास शुरू कर दिया है। प्रत्येक ट्रेन में आरक्षित श्रेणी में वेटिंग टिकटों की संख्या भी तय करने के लिए मंथन चल रहा है। इसके अलावा एक विकल्प यह भी अपनाया जा रहा है कि हर ट्रेन में एसी थर्ड कोच की संख्या कम कर एसी इकोनॉमी क्लास का कोच लगाया जाए।
एसी थर्ड में जहां 72 बर्थ होता है, वहीं इकोनॉमी क्लास में 80 बर्थ होते हैं। इस कोच के लगने से आठ अधिक यात्रियों को कंफर्म सीट मिल सकेगी। रेलवे के एक वरिष्ठ अफसर ने बताया कि इकोनाॅमी कोच लगने से एक तो एसी थर्ड स्तर के सीट का किराया कम होगा, दूसरे सीट भी अधिक मिलेगी।
अभी केवल महबूबनगर स्पेशल में लगा है कोच, अब दूसरों की बारी
गोरखपुर से चलने वाले गोरखपुर-महबूबनगर स्पेशल ट्रेन में इकोनॉमी श्रेणी का ही कोच लगाया गया है। इससे पहले मुंबई से चलने वाली एलटीटी-गोरखपुर स्पेशल ट्रेन में भी इस श्रेणी का कोच लगाया गया था। अब गोरखपुर से चलने वाली अन्य ट्रेनों में भी इस श्रेणी का कोच लगाने की तैयारी चल रही है। जैसे ही कोच मिलेंगे, उन्हें रीप्लेस किया जाएगा।
55 ट्रेनों में बदली गई रेक संरचना
पूर्वोत्तर रेलवे से चलने वाली 55 ट्रेनों में रेक संरचना में भी बदलाव किया गया। इनमें से किसी में एसी थर्ड की जगह सेकेंड क्लास तो किसी में सेकेंड क्लास के कोच लगाए गए हैं। ट्रेनों में कोच की संख्या भी बढ़ाई गई है। अधिकांश में यह परिवर्तन अक्तूबर-नवंबर से लागू होगा। नए इकोनॉमी क्लास के कोच लगने व कोच संरचना बदलने के बाद उम्मीद है कि ट्रेनों में वेटिंग टिकट के मामलों का काफी हद तक समाधान हो जाएगा।
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