ई-रिक्शा हादसे में मरी कांती की फाइल फोटो।
भतीजे के जन्मदिन पर मऊ से आई थीं कांति, हादसे में चली गई जान
पति की 15 साल पहले हो चुकी है मौत, दो बेटियों की शादी का सपना अधूरा
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। ई-रिक्शा की सवारी मऊ की कांति देवी के जीवन का अंतिम सफर बन गया। वह भतीजे के जन्मदिन में शामिल होने के लिए शुक्रवार सुबह गोरखपुर आई थीं। जन्मदिन का कार्यक्रम खत्म होने के बाद शनिवार को मऊ जाने के लिए घर से निकाली थीं कि ई-रिक्शा पलटने से हादसे में उनकी जान चली गई। उनकी मौत से दो बेटियां अनाथ हो गईं। पति बलिराम मद्धेशिया की 15 साल पहले ही मौत हो चुकी है। तीन बेटियों से एक की ही शादी हो सकी थी। दो बेटियों मधु (15) व विद्या (13) की शादी का उनका सपना अधूरा रह गया।
भाई तीरथ बताते हैं, बहन मेरे ही बेटे के जन्मदिन में शामिल होने के लिए आई थीं। गोरखनाथ मंदिर में दर्शन करने के बाद घर पर खाने का कार्यक्रम था। इसके बाद शनिवार को वह मऊ जाने के लिए निकली थीं। साथ में बहन ममता और बहनोई भी थे। दो अन्य लोगों को भी चालक ने बैठा लिया और फिर रास्ते में हादसा हो गया। हालांकि, तीरथ यह भी बताते हैं कि केस दर्ज कराया गया है, अब उन्हें इंसाफ चाहिए।
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एक्सपर्ट कमेंट
ई-रिक्शा में बैठा सकते हैं सिर्फ चार सवारी। इसकी अधिकतम गति सीमा 25 किलोमीटर प्रति घंटा से अधिक नहीं होनी चाहिए। इसके मोटर की ताकत 2000 वाट से अधिक नहीं होनी चाहिए। इसमें चालक के अलावा चार सवारी से ज्यादा नहीं बैठाने चाहिए। कुल सामान का भार 40 किलोग्राम से अधिक नहीं होना चाहिए। अग्निशमन यंत्र होना होना जरूरी है।
- राघव कुशवाहा, आरआई परिवहन विभाग