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जनता दर्शन: मुख्यमंत्री जी ! डीजे के शोर से गायें कम दे रही हैं दूध, बंद करवाइये- जानिए किसने की फरियाद

Tue, 12 Nov 2024 10:24 AM IST
रोहित सिंह अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर

सार

वाराणसी जिले के ग्राम दशवतपुर निवासी संदीप सिंह जनता दर्शन में गोरखपुर आए थे। उन्होंने कहा कि उन्होंने चार गायें पाल रखी हैं। उनके चाचा के पास भी 10 गायें हैं। गांव के कई और लोग भी पशुपालन करते हैं। पिछले 6-7 वर्षों से ऐसा हो रहा है कि त्योहारों के वक्त जब तेज आवाज में डीजे बजता है, तब गायों का दूध कम हो जा रहा है। पशु चिकित्सक बता रहे हैं कि तेज ध्वनि के कुप्रभाव से ऐसा हो रहा है।
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वाराणसी के संदीप सिंह ने शिकायत की - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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डीजे के शोर से इंसान ही नहीं, जानवर भी परेशान हो रहे हैं। वाराणसी के एक पशुपालक की गायें शोर की वजह से कम दूध दे रही हैं। पशुपालक ने सोमवार को गोरखपुर में मुख्यमंत्री के जनता दर्शन कार्यक्रम में पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। मुख्यमंत्री ने इसे गंभीरता से सुना और डीजे के शोर पर नियंत्रण लगाने का आश्वासन दिया।

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वाराणसी जिले के ग्राम दशवतपुर निवासी संदीप सिंह ने कहा कि उन्होंने चार गायें पाल रखी हैं। उनके चाचा के पास भी 10 गायें हैं। गांव के कई और लोग भी पशुपालन करते हैं। पिछले 6-7 वर्षों से ऐसा हो रहा है कि त्योहारों के वक्त जब तेज आवाज में डीजे बजता है, तब गायों का दूध कम हो जा रहा है। पशु चिकित्सक बता रहे हैं कि तेज ध्वनि के कुप्रभाव से ऐसा हो रहा है।

पुलिस डीजे की आवाज थोड़ा कम कराती है, लेकिन वह भी 100 डेसिबल से अधिक ही रहता है। शिकायतकर्ता संदीप सिंह का कहना है कि मुख्यमंत्री ने उनकी बातों को गंभीरता से सुना और इस पर नियंत्रण की बात कही।
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उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की वेबसाइट पर उपलब्ध आदेश के मुताबिक रात्रि 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच सिवाय साउंड प्रूफ ऑडिटोरियम के किसी भी खुली जगह में लाउडस्पीकर नहीं बजाए जा सकते हैं, मगर नियम का पालन नहीं हो रहा है।

सत्या फाउंडेशन की तरफ से किया जा रहा है जागरूक : सामाजिक संगठन सत्या फाउंडेशन के संस्थापक सचिव चेतन उपाध्याय ने बताया कि शोर की वजह से मनुष्य ही नहीं जीव-जंतुओं का जीवन भी प्रभावित हो रहा है। दूध उत्पादन पर असर का मामला तो आया ही है, अन्य जानवरों के व्यवहार भी बदल रहे हैं। इसीलिए उनका संगठन वर्ष 2008 से ही शोर के खिलाफ अभियान चला रहा है। स्कूलों में जाकर बच्चों को भी जागरूक किया जा रहा है।

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