कुनराघाट स्थित महादेव झारखंडी मंदिर में महाशिवरात्रि मेंं श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। श्रद्धालुओं की यहां भोलेनाथ पर विशेष आस्था है। मान्यता है कि भक्तों की मुरादें यहां पूरी होती हैं। 26 फरवरी को महाशिवरात्रि मनाने को लेकर तैयारियां चल रही हैं।
यहां भगवान भोलेनाथ के शिवलिंग को स्वयंभू (उस जगह पर खुद से ही पहले से स्थापित) कहा जाता है। मंदिर के इतिहास के बारे में बताया जाता है कि मंदिर स्थल पर पहले घना जंगल होता था। यहां लकड़हारे रहते थे, जो लकड़ी काटकर अपना जीवन व्यतीत करते थे।
1928 में अपनी जीविका के लिए एक लकड़हारा लकड़ी काट रहा था तभी उसकी कुल्हाड़ी एक पत्थर से टकराई थी। पत्थर से खून निकलने लगा था। यह देख लकड़हारा हैरत में पड़ गया। उसने आसपास की जमीन को साफ कर के पत्थर को देखा तो वह शिवलिंग निकला।
उसने तुरंत उस शिवलिंग को निकालने की कोशिश की पर वह नीचे ही धंसता जा रहा था। लकड़हारा की सूचना पर वहां के जमींदार ने भी शिवलिंग को ऊपर करने की कोशिश की पर असफल होने पर वहां पूजा-अर्चना शुरू कर दी। शिवलिंग हमेशा पत्तों से ढका रहता था इसलिए इस मंदिर को लोग महादेव झारखंडी के नाम से जानने लगे। बाद में मंदिर का जीर्णोद्धार हुआ।