बीआरडी मेडिकल कॉलेज में सबसे अधिक विवाद मेडिसिन में ही होता है। जबकि, यहां पर सीनियर डॉक्टरों की संख्या 15 के आसपास है। लेकिन, इनमें से केवल तीन से चार डॉक्टर ही ऐसे हैं, जो वार्ड में मरीजों का देखने जाते हैं। अन्य डॉक्टर केवल शाम को राउंड लेने ही जाते हैं। वह भी कभी कभार।
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पांच सीनियर परामर्शदाता की ट्रॉमा में हैं ड्यूटी रहते जूनियर डॉक्टर
ट्रॉमा सेंटर में पांच सीनियर परामर्शदाता की ड्यूटी है, लेकिन ये डॉक्टर ड्यूटी के नाम पर अपने-अपने विभाग में चले जाते हैं। ट्रॉमा सेंटर भी जूनियर डॉक्टरों के भरोसे चल रहा है। यहीं से मारपीट की शुरुआत भी होती है। ट्रॉमा में 80 से 90 फीसदी केस सर्जरी, आर्थाे और मेडिसिन के होते हैं। अगर ट्रॉमा में सीनियर परामर्शदाता ड्यूटी करने लगें तो मारपीट के मामले खुद ब खुद खत्म हो जाएंगे। वहीं, बाल रोग विभाग सहित अन्य विभागों में मारपीट के मामले सामने नहीं आते हैं।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. गणेश कुमार ने कहा कि बीआरडी मेडिकल कॉलेज का कोई भी डॉक्टर अगर निजी अस्पताल में प्रैक्टिस के लिए जाता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। ट्रॉमा और मेडिसिन में सीनियर डॉक्टरों की तैनाती की गई है। वे ओपीडी के साथ मरीजों का इलाज भी करते हैं। रही बात जूनियर डॉक्टरों के मारपीट की तो उन्हें सख्त हिदायत दी गई है।