चिड़ियाघर के मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. योगेश प्रताप सिंह ने बताया कि गेंडा के भोजन में बर्सीन की मात्रा बढ़ गई है। उसे गन्ना व शकरकंद हफ्ते में चार दिन दिया जा रहा है।
गर्मी शुरू होते ही चिड़ियाघर में वन्यजीवों की डाइट में परिवर्तन कर दिया गया है। बब्बर शेर और बाघ की खुराक कम कर दी गई है। उन्हें अब 14 की जगह 12 किलो गोश्त दिया जा रहा है। ज्यादातर जानवर दिन में या तो तालाब या फिर छांव में बैठे नजर आ रहे हैं।
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शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणि उद्यान (चिड़ियाघर) में पक्षियों के बाड़े में चारों तरफ लगे पर्दे हट गए हैं। दिन के समय बाड़े में निकल कर वन्यजीव दर्शकों का मनोरंजन भी कर रहे हैं। एक मार्च से बाघ को 12 किलो, तेंदुआ और लकड़बघ्घा को छह से चार किलो, सियार व भेड़िया को डेढ़ किलो से एक किलो, लोमड़ी को एक किलो से आधा किलो मांस अब दिया जा रहा है।
चिड़ियाघर के मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. योगेश प्रताप सिंह ने बताया कि गेंडा के भोजन में बर्सीन की मात्रा बढ़ गई है। उसे गन्ना व शकरकंद हफ्ते में चार दिन दिया जा रहा है। हिरन, बंदर समेत अन्य को भोजन के साथ मिलने वाले गुड़ को भी सप्ताह में तीन दिन कर दिया गया है।
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सांपघर में रहने वाले विभिन्न प्रजातियों के सांप का भोजन बढ़ गया है। ठंड में 25 दिन में एक चूहा दिया जाता था, अब सप्ताह में दिया जा रहा है। मगरमच्छ और घड़ियाल को सप्ताह में दो बार मछलियां खाने को दी जा रही हैं।