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Gorakhpur: बतख पालन से भी बना जा सकता है आत्मनिर्भर, कम जोखिम में पा सकते हैं बड़ा लाभ

Mon, 05 Dec 2022 12:36 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, जंगल कौड़िया।

सार

बतखों की वजह से तालाब की उर्वरा शक्ति में इजाफा हो जाता है। जब बतख तालाब के पानी में तैरती हैं तो उन की बीट से मछलियों को प्रोटीनयुक्त आहार की आपूर्ति सीधे तौर पर हो जाती है जिस से मछलीपालक मछलियों के आहार के खर्च में 60 फीसदी की कमी ला सकते हैं।
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बतख पालन। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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बतख पालन करने वालों को बहुत हीं अल्प लागत में अच्छा लाभ हो सकता है। क्योंकि बतख छह महीने में ही अंडे व मांस देने योग्य हो जाते हैं। इनके एक अंडे की कीमत बाजार में लगभग 10- 12 रुपये है। मुर्गी पालन के मुकाबले बतख पालन में कम जोखिम होता है। बतखों में मुर्गी के मुकाबले मृत्यु दर बेहद कम है।

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बतख एक समझदार पक्षी है, जो आवश्यकतानुसार समय पर बाहर घूम फिर कर अपने निश्चित दड़बे में बिना किसी विशेष प्रयत्न के आ सकते हैं। बतख पालन में उनके आहार, आवास आदि चीजों में बहुत कम खर्च लगता है, इसलिए इसे कोई भी अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति सुधार सकता है।

बतख पालन से होने वाले लाभ
उन्नत नस्ल के बतख 1 वर्ष में 300 से अधिक अंडे देते हैं, जिनका वजन 65 से 70 ग्राम होता है। मुर्गियों के अंडे सायंकाल तक एकत्रित करने होते हैं जबकि ज्यादातर बतख प्रात: नौ बजे से पूर्व ही अंडे दे देती हैं।
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बतख के साथ मछलीपालन में और लाभ

जिस तालाब में बतखों को तैरने के लिए छोड़ा जाता है, उस में अगर मछली का पालन किया जाए तो एकसाथ दोगुना लाभ लिया जा सकता है। दरअसल बतखों की वजह से तालाब की उर्वरा शक्ति में इजाफा हो जाता है। जब बतख तालाब के पानी में तैरती हैं तो उन की बीट से मछलियों को प्रोटीनयुक्त आहार की आपूर्ति सीधे तौर पर हो जाती है जिस से मछलीपालक मछलियों के आहार के खर्च में 60 फीसदी की कमी ला सकते हैं।

तालाब, झील एवं अन्य जल बहुल्य क्षेत्रों में कवक, शैवाल के साथ जल में उगने वाली घास, घोंघे, मछलियां, कीड़े इत्यादि बतखों के लिए प्राकृतिक आहार है। अत: बतख के ऊपर किया जाने वाला आहार व्यय कम हो जाता है।

बतख की नस्ल
अंडा उत्पादन करने के लिए कैपवेल तथा इंडियन रनर प्रमुख हैं जबकि मांस उत्पादन वाले नस्लों में एलीसवरी, पेकिंग तथा मसकोवी से उत्तम लाभ प्राप्त होता है।

गोरखपुर के केंद्राध्यक्ष महायोगी गोरखनाथ कृषि विज्ञान केंद्र चौकमाफी डॉ. विवेक प्रताप सिंह ने कहा कि अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र से प्रशिक्षण प्राप्त कर किसान बतख के साथ मछली पालन करें। जिससे उनको अधिक आय प्राप्त हो सके।
 
जंगल कौड़िया के महंत अवेद्यनाथ राजकीय महाविद्यालय आचार्य जीव विज्ञान विभाग डॉ. दिग्विजय सिंह ने कहा कि बतख के अंडे तथा मास प्रोटीन तथा अन्य पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। किसान बतख पालन कर अच्छा आय अर्जन कर सकते हैं।
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