कसरवल कांड से चर्चा में आए डॉ. संजय
गोरखपुर-संतकबीरनगर के बॉर्डर पर कसरवल के पास निषाद आरक्षण को लेकर प्रदर्शन चल रहा था। तब सपा सरकार थी। प्रदर्शन के दौरान ही गोली चली और एक शख्स की मौत हो गई। इस मामले में डॉ. संजय निषाद ने प्रमुखता से उठाया। इसी घटना के बाद वह चर्चा में आ गए।
राजनीति से पहले क्लिनिक चलाते थे डॉ. संजय निषाद
राजनीति में आने से पहले डॉ. संजय निषाद गोरखपुर में इलेक्ट्रो होम्योपैथी की क्लीनिक चलाते थे। 2002 में पूर्वांचल मेडिकल इलेक्ट्रो होम्योपैथी एसोसिएशन बनाया। इस विधि को मान्यता दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट भी गए थे।
संगठन बनाकर राजनीति में कूदे
डॉ. संजय राजनीति में लंबे समय से हैं। वह 2008 में बामसेफ से जुड़े थे। इसी बीच उन्होंने ऑल इंडिया बैकवर्ड एंड माइनोरिटी वेल्फेयर मिशन और शक्ति मुक्ति महासंग्राम नाम के दो संगठन बनाए। निषाद पार्टी के गठन से पहले निषाद एकता परिषद बनाई और यहीं से मछुआ समुदाय को एक पहचान दिलाने का काम शुरू कर दिया। उन्होंने मछुआ समुदाय की 553 जातियों को एक मंच पर लाने की मुहिम शुरू की है।
दो चुनावों में मिली थी हार
कैंपियरगंज से पहली बार विधानसभा का चुनाव भी लड़े, लेकिन हार का सामना करना पड़ा। जिला पंचायत सदस्य का चुनाव भी लड़ा था। 2017 के विधानसभा चुनाव में निषाद पार्टी व पीस पार्टी के बीच गठबंधन हुआ। दोनों पार्टियों ने उत्तर प्रदेश की 72 सीटों पर चुनाव लड़ा था। भदोही की ज्ञानपुर विधानसभा सीट से निषाद पार्टी के प्रत्याशी को जीत मिली थी। डॉ. संजय निषाद ने गोरखपुर ग्रामीण से चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में डॉ. संजय को 34,869 वोट मिले थे। इसके बावजूद चुनाव हार गए।