गंगा डॉल्फिन नदियों के साफ जल में रहने वाला प्राणि है, इसका यहां पाया इस बात का द्योतक है कि नदी का पानी जलीय जंतुओं के लायक है। नदी में और भी डॉल्फिन हो सकती हैं, इसका पता लगाने के लिए कुकुर भूकवा गांव से नदी के अपस्ट्रीम और डाउन स्ट्रीम पांच-पांच किलोमीटर दूर तक तलाश की जा रही है।
गांव वालों ने बताया कि उन्होंने इस क्षेत्र में कभी यह मछली नहीं देखी है। जिला वन अधिकारी के अनुसार डॉल्फिन मिलने के बाद इस नदी और आसपास की नदियों का अध्ययन किया जाएगा इसमें लखनऊ और दिल्ली की वन्य जीवन टीमें भी शामिल होंगी।
जिला वन अधिकारी आकाशदीप वधावन ने बताया कि संरक्षित प्राणि सूंस या गंगा नदी डॉल्फिन जल परिस्थिकीय तंत्र के लिए शुभ संकेत है। सूंस प्राकृतिक परिमार्जक (नेचुरल एक्सकेवेंजर) है, यानी जल में पाए जाने वाले मृत जीवों को खाकर जलीय प्रदूषण समाप्त करती है। वन्य जीव जानकारों के अनुसार गंगा डॉल्फिन का केंद्र पटना के पास गंगा नदी है। बाढ़ आने पर यह प्राणी धारा के विपरीत तैरता है, संभव है कि डॉल्फिन का बड़ा झुंड यहां पहुंचा हो।