जमानत पर रिहा होने के बाद से ही डॉ.कफील लगातार सरकार के खिलाफ बगावती तेवर अख्तियार किए हुए हैं। बीआरडी मेडिकल कालेज में बच्चों की मौत के मामले में कालेज प्रशासन पर हेरफेर का आरोप लगाते हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों में जाकर लगातार इंसेफेलाइटिस के लक्षण मरीजों में पाए जाने की पुष्टि करते हैं। 2017 में उनके भाई पर हुए हमले में उन्होंने भाजपा के एक सांसद और उनके व्यवसायिक मित्र पर सवाल खड़ा किया था।
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हिरासत में डॉ. कफील
- फोटो : amar ujala
कफील ने इस वारदात के बाद ट्वीट कर कहा था कि अल्लाह रहम करे, मैं झुकने वाला नहीं हूं। उनके परिवार ने पुलिस सुरक्षा की मांग की थी। तब डॉक्टर कफील ने कहा था कि सांसद की मेरे भाई से कोई सीधे दुश्मनी नहीं है। दरअसल मेरे चाचा की जमीन पर कुछ लोगों ने कब्जा कर रखा है।
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डॉक्टर कफील खान
क्लीन चिट की अफवाह फैलाने में भी आरोपी थे
कुछ महीने पहले ही डॉक्टर कफील ने सरकार द्वारा जांच में क्लीन चिट दिए जाने की बात भी कही थी। कुछ चैनलों पर यह खबर आने के बाद सरकार की ओर से इसका खंडन करते हुए बताया गया था कि उनके ऊपर लगाए गए आरोपों की जांच अभी जारी है।
बहराइच और अलीगढ़ में दर्ज हैं मुकदमें
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी से बच्चों की मौत के मामले में आरोपी डॉ. कफील के खिलाफ बहराइच और अलीगढ़ में मुकदमे दर्ज हैं। 2018 में जमानत पर रिहा होने के बाद डॉ कफील बहराइच के जिला अस्पताल में निरीक्षण करने पहुंच गए थे। इस बात की भनक लगते ही अस्पताल प्रशासन की ओर से एक केस दर्ज कराया गया था, तब से ही डॉ कफील सुर्खियों में हैं। इसके बाद अलीगढ़ में डॉक्टर के खिलाफ भड़काऊ भाषण देने का केस दर्ज किया गया था।