गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के शरीर में कई तरह के हार्मोनल बदलाव होते हैं। शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता प्रभावित होती है। कोरोना संक्रमण के लक्षण गर्भवती को भी बुखार, खांसी, मांसपेशियों में दर्द, थकान, सिर दर्द और खून की खांसी भी हो सकती है। ऐसे में आयुर्वेद के जरिए इन बीमारियों से बचा जा सकता है।
यह जानकारी राजकीय आयुर्वेद चिकित्सालय की डॉ. मनोरमा सिंह ने दी। बताया कि गर्भावस्था के 6, 12, 20, 28, 36वें सप्ताह में अपने चिकित्सक से एक बार जरूर संपर्क करें। 24वें सप्ताह के बाद बच्चे की संचरन की निगरानी करें। यदि यह 24 घंटे में तीन बार से कम है, तो डॉक्टर से संपर्क करें। पानी में हल्दी और नमक डालकर उसे उबाल कर कुल्ला करें। एक चम्मच नारियल का तेल मुंह में दो से तीन मिनट रखकर घुमाएं। बाद में उसे थूक दें। उसके बाद गर्म पानी से कुल्ला करें।
नारियल का तेल या गाय का घी नाक में लगाएं। पानी में अजवाइन या कपूर या नीलगिरी तेल डालकर भाप लें। इसके अलावा गर्भ संस्कार के लिए, ओंकार मंत्र सुनें, ओम का जाप करें, अच्छे गाने सुनें। प्राणायाम में अनुलोम-विलोम नियमित रूप से करें। योगासन में भद्रासन, वृक्षासन, पवन मुक्तासन, त्रिकोण आसन, बद्ध कोणासन करें।
इन आहारों का करें सेवन
डॉ मनोरमा सिंह ने बताया कि संतुलित आहार का सेवन करें, भोजन में दूध, अंडा, मक्खन, पनीर, दही, हरी सब्जियां, फल में तरबूज, आम, केला अंगूर, नारियल पानी और ड्राई फ्रूट्स में खजूर, मुनक्का, बादाम का विशेष रूप से सेवन करें।