जगदीशपुर-जंगल कौड़िया रिंग के निर्माण का मामला, कम मुआवजे पर राजी नहीं लोग
इटहिया गांव में तहसील प्रशासन के साथ पहुंचे थे कार्यदायी संस्था के कर्मचारी
गोरखपुर। जगदीशपुर-जंगल कौड़िया रिंग रोड के निर्माण को लेकर सहमति नहीं बन पा रही है। कम मुआवजे पर किसान अपनी भूमि देने को तैयार नहीं हैं। रविवार को इटहिया गांव में एनएचएआई और कार्यदायी संस्था के कर्मचारी गांव में पहुंचे। अधिग्रहित जमीन पर पिलर लगाने का प्रयास किया तो ग्रामीणों ने विरोध जताते हुए रोक दिया। कहा कि बिना उचित मुआवजा दिए काम नहीं शुरू होने दिया जाएगा।
जगदीशपुर-जंगल कौड़िया रिंग रोड के लिए कुल 26 गांवों के किसानों की भूमि अधिग्रहित की गई है। किसानों का सहमति पत्र भरवाने के लिए राजस्व विभाग, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और एसएलओ (भूमि अध्याप्ति अधिकारी) के कर्मचारी लोगों को जागरूक कर रहे हैं, लेकिन किसान अभी इसको लेकर सहमति नहीं बना पा रहे हैं।
रविवार को कार्यदायी संस्था के कर्मचारी नायब तहसीलदार विकास कुमार के साथ गांव में पहुंचे। किसानों से बातचीत करके काम शुरू कराने को कहा, लेकिन लोगों ने नाराजगी जताते हुए काम करने से मना कर दिया। ग्रामीणों ने बताया कि ऐसे लोगों की जमीन और मकान रिंग रोड की जद में आ रही है, जिनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है।
इसी गांव की रेनू देवी के पास सिर्फ छह डिसमिल जमीन है। पूरी जमीन निकलने से परिवार के पास कोई सहारा नहीं रहेगा। इसलिए सभी को उचित मुआवजा दिया जाए। इस दौरान एक घंटे तक बातचीत चली, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। किसी विवाद की आशंका में गुलरिहा थाने की पुलिस फोर्स भी मौजूद रही।
नायब तहसीलदार सहित अन्य कर्मचारी गांव में गए थे। लोगों को समझाने का प्रयास किया गया, लेकिन नहीं माने। दोबारा टीम भेजकर लोगों को रिंग रोड के फायदे के बारे में बताया जाएगा।
- विकास सिंह, तहसीलदार सदर