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गोरखपुर: पुतला फूंकने के दौरान एबीवीपी व एनएसयूआई कार्यकर्ता भिड़े

Thu, 09 Jan 2020 10:51 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
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विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर पुतला फूंकने के दौरान एनएसयूआई और एबीवीपी के कार्यकर्ता आपस में
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गोरखपुर विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर जेएनयू की घटना के विरोध में पुतला फूंकने पहुंचे एनएसयूआई और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) कार्यकर्ताओं में जमकर धक्कामुक्की हुई। 10 मिनट तक हंगामा हुआ। एनएसयूआई कार्यकर्ता एबीवीपी का पुतला फूंकने पहुंचे थे। एबीवीपी कार्यकर्ताओें ने पुतला छीनकर फेंक दिया और चले गए। बाद में एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने पुतला जलाया और नारेबाजी कर विरोध जताया।
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बुधवार को दोपहर बाद एनएसयूआई के प्रदेश उपाध्यक्ष योगेश प्रताप सिंह के नेतृत्व में कार्यकर्ता मुख्य द्वार पर पहुंच गए। वहां पहले से एबीवीपी कार्यकर्ता मौजूद थे। एबीवीपी का पुतला फूंकने की बात पर कार्यकर्ता भड़क गए और दोनों संगठनों के कार्यकर्ताओं के बीच कहासुनी होने लगी। एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने एनएसयूआई कार्यकर्ताओं से पुतला छीनकर सड़क पर फेंक दिया। उस वक्त प्रदेश महासचिव ऋषि यादव, अतुल मिश्रा, विख्यात भट्ट, अंकित पांडेय, प्रखर पांडेय, आर्या यादव, आशुतोष तिवारी, राज, शांतनु यादव, पुनीत तिवारी, शुभम कुमार आदि मौके पर मौजूद थे।
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गोविवि के एबीवीपी इकाई के मंत्री अरुण कुमार ने कहा कि एनएसयूआई की ओर से टुकड़े-टुकड़े गैंग का समर्थन करना और विश्वविद्यालय मुख्यद्वार पर एबीवीपी का पुतला जलाने की कोशिश निंदनीय है। बाबा गोरखनाथ की धरती पर टुकड़े-टुकड़े गैंग को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

एनएसयूआई के प्रदेश उपाध्यक्ष योगेश प्रताप सिंह ने कहा कि एबीवीपी कार्यकर्ता पूरे देश में विद्यार्थियों और नौजवानों को पीटने का काम कर रहे हैं। इसे किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
निधेषाज्ञा की अनदेखी, मूकदर्शक बनी रही पुलिस

मंगलवार को ही विश्वविद्यालय प्रशासन ने निषेधाज्ञा का हवाला देकर परिसर में धरना-प्रदर्शन और किसी प्रकार के आंदोलन पर रोक लगा दी थी। इसके बाद भी छात्र संगठनों से जुड़े विद्यार्थी विश्वविद्यालय के गेट पर पहुंचे। एबीवीपी और एनएसयूआई कार्यकर्ताओं में जमकर धक्कामुक्की हुई। वहां मौजूद पुलिस टस से मस नहीं हुई। माना जा रहा है कि शुरूआत कहीं से भी हो, ठीकरा अंत में पुलिस के सिर ही फूटता है। यही सोचकर बुधवार को पुलिस ने पूरे मामले में हाथ न डालने में ही अपने भलाई समझी।
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