उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में चाइल्ड लाइन ने गूगल की मदद से एक भटके दिव्यांग किशोर के परिवार को खोज निकाला। बुधवार रात किशोर को उसकी मां के हवाले कर दिया गया। बोलने और सुनने में अक्षम किशोर ने लिखकर अपना और अपने स्कूल का नाम बताया था। गूगल पर स्कूल, फिर एक जैसे नामों वाले स्कूलों में से किशोर के स्कूल की तलाश पूरी होने के साथ ही किशोर के अभिभावक भी मिल गए।
बुधवार की रात कानपुर निवासी किशोर की मां उसे लेने गोरखपुर रेलवे स्टेशन पहुंचीं तो बच्चे को देखते ही उनके आंसू छलक उठे। किशोर पांच अक्तूबर की रात 11 बजे के करीब रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ एस्कोर्ट को भटकता हुआ मिला था।
आरपीएफ ने उसे अपनी अभिरक्षा में लेकर चाइल्ड लाइन को सौंप दिया। चाइल्ड लाइन के सदस्यों ने बच्चे की काउंसिलिंग की। इसके बाद उसने अपना और विद्यालय का नाम कागज पर लिखा। चाइल्ड लाइन के गोपाल चौधरी ने बताया कि विद्यालय का नाम गूगल पर खोजा तो उस नाम के कई विद्यालय मिल गए। इसके बाद सभी जगहों पर फोन पर किशोर के बारे में पूछताछ की गई।
कानपुर के विद्यालय ने किशोर की पहचान कर ली और उसकी मां का नंबर दिया। मां को सूचना देकर बुलाया गया और उन्हें सात अक्तूबर की रात को बच्चे को सुपुर्द कर दिया गया। मां को देखते ही किशोर उनसे लिपट गया और मां की ममता भी छलक उठी।
मां ने बताया कि वह कानपुर में रावतपुर क्षेत्र की रहने वाली हैं। उन्होंने किसी बात को लेकर किशोर को डांट दिया था, जिसके बाद वह घर छोड़कर चला गया। मां ने चाइल्ड लाइन के प्रति आभार प्रकट किया।