हॉकी खिल़ाड़ी प्रीती दुबे अपने मां-पिता के साथ
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हॉकी खिलाड़ी प्रीति दूबे को 2018 में प्रैक्टिस के दौरान चोट लग गई थी, जिसके बाद वह टीम से बाहर हो गईं। लेकिन इन छह सालों में उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और दिन-रात मैदान में पसीना बहाया। टीम में चयन की सूचना के बाद परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई है।
प्रीति ने फोन पर बताया कि चोट के बाद फुल फिटनेस हासिल करने में वक्त लगा। इसके बाद कोविड की वजह से भी नुकसान हो गया। लेकिन इस दौरान प्रैक्टिस जारी रखी। इस समय बंगलुरू में प्रैक्टिस चल रही है। भारतीय टीम इस बार ओलंपिक्स के लिए क्वालीफाई नहीं कर पाई, लेकिन अब किसी तरह 2028 ओलंपिक्स के लिए क्वालीफाई करना और देश के लिए मेडल लाना ही उनका लक्ष्य है।
प्रीति के भाई फणीश दूबे ने बताया कि चोट से उभरने के बाद प्रीति ने सेंट्रल रेलवे, मध्य प्रदेश और इंडियन रेलवे की टीमों से खेला। दो सालों में उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता कठिन होने की वजह से टीम में जगह बनाना मुश्किल था। इस बार नेशनल गेम्स में उन्होंने अच्छा प्रदर्शन किया। लगातार शानदार प्रदर्शन ही उनके चयन का आधार बना। टीम से बाहर होने के बाद वापसी के लिए उन्होंने मेहनत डबल कर दी।