गोरखपुर। सूर्यकुंड धाम विकास समिति की ओर से चल रहे नौ दिवसीय विष्णु महायज्ञ व श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन सोमवार को रुक्मिणी विवाह महोत्सव धूमधाम से मनाया गया। भगवान कृष्ण और माता रुक्मिणी की विवाह झांकी के दौरान श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा की और मंगल गीत गाए।
कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजन से हुई। सुबह 10 बजे सामूहिक रुद्राभिषेक में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने मंगलकामना की। दोपहर में विष्णु महायज्ञ में विश्व कल्याण के लिए आहुति दी गई। वृंदावन से आए कलाकार कृष्ण और रुक्मिणी के रूप में मंच पर पहुंचे तो श्रद्धालु झूम उठे। अंत में प्रसाद के रूप में विवाह का लड्डू वितरित किया गया।
कथावाचक हनुमतेश ने कहा कि रुक्मिणी विवाह जीव और परमात्मा का मिलन है। रुक्मिणी ने कृष्ण को देखा नहीं, केवल सुना और सुनकर ही प्रेम हो गया। यही भागवत श्रवण की महिमा है। उन्होंने कहा कि पति-पत्नी का रिश्ता विश्वास और समर्पण पर टिका होता है। जहां समर्पण है, वहीं भगवान हैं और जहां अहंकार है, वहां विनाश है। कार्यक्रम यज्ञाचार्य प्रशांत दुबे और हिमांशु दुबे के नेतृत्व में 11 वेदपाठी ब्राह्मणों ने संपन्न कराया।
इस अवसर पर संतोष मणि त्रिपाठी, मदन राजभर, कनक लता मिश्रा, परमात्मा राम त्रिपाठी, अरविंद चौरसिया समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।