भारतीय दूतावास में भाई की तलाश में बैठे तमिलनाडु के रामनाथन
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काठमांडो स्थित भारतीय दूतावास में एक कोने में गुमसुम बैठे तमिलनाडु के रामनाथन की आंखों में बेचैनी और चेहरे पर मायूसी साफ नजर आ रही थी। बार-बार अधिकारियों से एक ही सवाल कर रहे थे- मेरे भाई का कुछ पता चला? तलाश करते-करते थक चुके रामनाथन ने आखिरकार अधिकारियों से कहा, अगर वह जिंदा नहीं है तो उसकी लाश ही दिला दो। इतना कहते ही वह फफक पड़े।
रामनाथन अपने छोटे भाई देवनाथन की तलाश में तमिलनाडु से नेपाल पहुंचे हैं। उन्होंने बताया कि देवनाथन चार दोस्तों के साथ नेपाल आया था। यात्रा पूरी करने के बाद उसने आखिरी बार फोन कर घरवालों को बताया था कि यात्रा पूरी हो गई है और अब वह वापस लौट रहा है। इसके बाद उसका मोबाइल फोन बंद हो गया।
भाई के अचानक संपर्क से बाहर होने के बाद परिवार की चिंता बढ़ती गई। कोई जानकारी नहीं मिली तो रामनाथन नेपाल पहुंच गए। पिछले दो दिनों से वह काठमांडो स्थित भारतीय दूतावास के चक्कर लगा रहे हैं। सुबह से शाम तक अधिकारियों से जानकारी लेने की कोशिश करते हैं, लेकिन हर बार इंतजार के अलावा कुछ हाथ नहीं आता।
रामनाथन ने कहा, समझ में नहीं आ रहा कि क्या करूं। भाई के बारे में कुछ पता नहीं चल रहा। उम्मीद लेकर यहां आता हूं, लेकिन अभी तक कोई खबर नहीं मिली। दूतावास में रामनाथन और उनके भाई से संबंधित जानकारी दर्ज कर ली गई है।
अधिकारियों ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि देवनाथन के संबंध में जैसे ही कोई सूचना मिलेगी, परिवार को इसकी जानकारी दी जाएगी। रामनाथन की नजरें अब हर उस सूचना पर टिकी हैं, जिससे उन्हें अपने भाई का सुराग मिल सके। उनके लिए अब सबसे बड़ी चिंता यह जानना है कि देवनाथन सुरक्षित है या नहीं। इंतजार लंबा होता जा रहा है और हर गुजरता पल परिवार की बेचैनी बढ़ा रहा है।