खाद्य सुरक्षा विभाग को खबर मिली थी कि बरईपार गांव में एक व्यक्ति मिलावटी पनीर बनाने का कारखाना चलाता है। 20 मई को सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा डाॅ. सुधीर कुमार सिंह ने छापा मारा तो वहां बड़े पैमाने पर मिलावट की पुष्टि हुई। यहां से प्रतिदिन 300 क्विंटल पनीर गोरखपुर-बस्ती मंडल के जिलों में भेजी जाती थी।
मिलावटखोर पनीर बनाने के लिए पाउडर वाले जिस दूध का इस्तेमाल कर रहे हैं, उसमें झाग और अधिक सफेदी के लिए डिटर्जेंट का भी इस्तेमाल कर रहे हैं। बीते 20 मई को पिपराइच क्षेत्र के बरईपार में जो पनीर की फैक्टरी पकड़ी गई थी, वहां से लिए गए दूध के नमूने में भी इसकी पुष्टि हुई है।
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वहां तैयार पनीर को भी स्वास्थ्य के लिए असुरक्षित पाया गया है। अब फैक्ट्री के संचालक खालिद पर खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत भी केस दर्ज किया जाएगा। खाद्य सुरक्षा विभाग को खबर मिली थी कि बरईपार गांव में एक व्यक्ति मिलावटी पनीर बनाने का कारखाना चलाता है।
20 मई को सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा डाॅ. सुधीर कुमार सिंह ने छापा मारा तो वहां बड़े पैमाने पर मिलावट की पुष्टि हुई। यहां से प्रतिदिन 300 क्विंटल पनीर गोरखपुर-बस्ती मंडल के जिलों में भेजी जाती थी। यहां पनीर के लिए जो दूध तैयार किया जाता था, उसमें दूध के पाउडर के अलावा पीसा गया सोयाबीन और रिफाइन मिलाया जाता था। झाग और सफेदी के लिए उसमें डिटर्जेंट मिलाया जाता था। इस प्रकार से तैयार दूध के सैंपल की रिपोर्ट में डिटर्जेंट की पुष्टि भी हुई है।
खालिद की फैक्टरी से लिए गए सैंपल की रिपोर्ट आ गई है। पनीर स्वास्थ्य के लिए हानिकारक मिला है। दूध के घोल में डिटर्जेंट की मिलावट मिली है। मौके पर रिफाइन, सैकरीन, पोस्टर कलर, सोडियम मेटा बाई सल्फाइड होने की पुष्टि भी हुई है। संचालक पर खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी:डाॅ. सुधीर कुमार सिंह, सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा
पांच दुकानों में छापा मारकर लिए गए पनीर व मैदा के नमूने
मिलावटी पनीर पर रोक के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने शुक्रवार को पांच दुकानों पर छापा मारा। इनमें से तीन दुकानों से पनीर के नमूने लिए गए। वहीं दो दुकानों से मैदा, जीरा व चूड़ा के नमूने लिए गए।
सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा डॉ. सुधीर कुमार सिंह ने बताया कि मेडिकल रोड स्थित माई इंडियन फ्लेवर, मिल्क पार्लर एवं माई ट्रायल में पनीर का नमूना लिया गया।
इसके अलावा बिछिया की दो दुकानों पर भी छापा मारा गया। पीएसी कैंप स्थित गुरु इंटरप्राइजेज में मैदा व जीरा एवं इसी स्थान पर गुप्ता इंटरप्राइजेज में चूड़ा का नमूना लिया गया। इस दौरान मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी हितेंद्र मोहन त्रिपाठी, खाद्य सुरक्षा अधिकारी नरेंद्र चौधरी, उमाशंकर व शैलेंद्र श्रीवास्तव ने जांच की।
खाद्य तेल: बार-बार गर्म होने पर बढ़ जाता है ट्रांस फैट, धमनियों में रोकता है खून का प्रवाह
खाद्य तेल को 100 डिग्री से अधिक तापमान तक गर्म करने पर उसमें पॉली अनसेचुरेटेड फैटी एसिड की मात्रा बढ़ने लगती है। यह फैटी एसिड धमनी की दीवार पर जमने लगता है। धमनी में जमा फैट खून के प्रवाह को रोकता है। इसके अलावा फैट लिवर के इर्द-गिर्द जमा होने लगता है।
कुछ मामलों में फैट शरीर के अलग-अलग हिस्सों में नसों में खून के प्रवाह को रोकता है, जिससे अंग विशेष को पर्याप्त मात्रा में रक्त नहीं मिलता और वह अंग नीला पड़ने लगता है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के डॉ. राजकिशोर बताते हैं कि खाद्य तेलों को जब उच्च तापमान में गर्म किया जाता है तो उनमें ऑक्सीकरण के कारण कई रासायनिक परिवर्तन होने लगते हैं।
बार-बार तेल को उच्च तापमान तक गर्म करने के फलस्वरूप उसमें तेजी से ट्रांस फैट बनने लगता है। इसके अलावा तेल में मौजूद वसा की वजह से काेलेस्ट्रॉल का लेवल भी बढ़ता है। जिला अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. राजेश कुमार बताते हैं कि बार-बार गर्म किए गए तेल में पका खाना आसानी से पचता नहीं है, बल्कि यह लिवर को भी बीमार करता है।