गोरखपुर। जिला अस्पताल के स्किन ओपीडी में रोजाना दस से अधिक महिलाएं डर्मेटाइटिस नामक त्वचा रोग की शिकायत लेकर पहुंच रही हैं। यह समस्या मुख्य रूप से बिंदी के गोंद और हेयर कलर में मौजूद रसायनों के कारण हो रही हैं। इससे डर्मेटाइटिस त्वचा रोग के मामले बढ़ रहे हैं।
त्वचा विशेषज्ञ का कहना है कि अच्छे उत्पादों का चुनाव और लक्षणों की समय पर पहचान करके इस संक्रमण को आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है। डर्मेटाइटिस मूल रूप से एक त्वचा की एलर्जी है। डॉ. अंबरी ने बताया कि बिंदी के गोंद में मौजूद पीटीबीपी रसायन और हेयर कलर के पीपीडी जैसे केमिकल्स जब त्वचा के संपर्क में आते हैं तो रिएक्शन शुरू हो जाता है। पसीने के कारण ये केमिकल त्वचा के भीतर तक पहुंच जाते हैं। इससे खुजली, लाल दाने और माथे पर सफेद दाग जैसी समस्याएं होने लगती हैं। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि बढ़ते मामले कॉस्मेटिक्स के अंधाधुंध इस्तेमाल का नतीजा हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि लोग अक्सर शुरुआती खुजली को नजरअंदाज कर देते हैं या बिना सलाह के कोई भी क्रीम लगा लेते हैं, जिससे समस्या बढ़ जाती हैं। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि किसी भी उत्पाद से जलन होते ही उसका उपयोग तुरंत बंद कर देना चाहिए। यह समस्या सिर्फ महिलाओं तक सीमित नहीं हैं। पुरुष भी इसका शिकार हो रहे हैं। पुरुष मुख्य रूप से हेयर कलर और दाढ़ी को काला करने वाले रंगों के कारण डर्मेटाइटिस की चपेट में आ रहे हैं। हेयर कलर के रिएक्शन से पुरुषों के चेहरे पर सूजन, आंखों के पास लालिमा और गर्दन पर खुजली वाले धब्बे देखे जा रहे हैं।