भटनी के घांटी गांव निवासी बृजेश कुशवाहा करीब पांच साल पूर्व दिल्ली में मेडिकल परीक्षा की तैयारी करने गए। काफी प्रयास के बाद भी सफलता हाथ नहीं लगी तो बाद में कंप्यूटर इंजीनियर की पढ़ाई के बाद वही एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करने लगे। कुछ दिनों बाद आर्मी से सेवानिवृत होकर आए उनके पिता भी वहीं पहुंच गए और बेटे के साथ नौकरी करने लगे।
बृजेश का सपना डॉक्टर बनकर लोगों की सेवा करना था। अपने परिचितों एवं मित्रों में भी वह इसी क्षेत्र में ही कॅरियर बनाने की बात करता था। हालांकि जब मेडिकल की परीक्षा में उसे कामयाबी हाथ न लगी तो कंप्यूटर इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर एक आईटी कंपनी में नौकरी करने लगा। तबसे वह वहीं का होकर रह गया था।
इसी दौरान अपने छोटे भाई राजू व चचेरे भाई विशाल को दिल्ली बुलाकर पढ़ाने लगा, ताकि उनका सपना साकार हो सके। व्यस्तता के कारण वह करीब पांच सालों से गांव नहीं आया था, और माता-पिता उसकी शादी की चिंता करने लगे थे।
देश में अचानक कोरोना संक्रमण एवं लॉकडाउन के चलते उसकी कंपनी व कोचिंग सेंटर बंद हो गया। मां के कहने पर वह अपने पिता व चचेरे भाई के साथ घर के लिए निकला। फैजाबाद पहुंचने के बाद उसने अपनी मां से फोन पर बात कर जल्द ही घर पहुंचने की बात कही थी। लेकिन शायद होनी को कुछ और ही मंजूर था।
बेटे की सड़क दुर्घटना में मौत की सूचना आते ही गांव पर मां जानकी देवी, नोएडा में फंसे भाई राजू का रो-रोकर बुरा हाल है। वही पिता, चचेरा भाई व गांव के रहने वाले उसके मित्र का इलाज मेडिकल कॉलेज में चल रहा है। चिकित्सकों के मुताबिक यहां पर तीनों की हालत नाजुक बनी हुई है।