मृत गोलू के पिता राधे निषाद की दो साल से मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। उसकी मां रेनू पीपीगंज कस्बे में एक परिवार के घर चौका बर्तन करके जीवन यापन करती हैं। गोलू सबसे बड़ा बेटा था और अपनी मां के कामों में मदद भी करता था। उसकी दो छोटी बहने व एक भाई है। परिवार का भरण-पोषण में मां के मददगार बेटे की मौत से परिवार वाले सदमे में हैं। मां ने शासन से आर्थिक मदद की मांग की है।
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मां का कहना है कि बेटा बिना कारण ही काल के गाल में समा गया। अगर ऊपर से लोग पत्थर न मारे होते तो उसकी जान नहीं जाती। पत्थर की वजह से ही वह डूबा और उसकी जान चली गई है। बीमार पति का इलाज कराने के साथ ही बच्चों को पालने की जिम्मेदारी अब उसके ही कंधे पर है।