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Gorakhpur News: सत्र 2022-23 के पार्ट टाइम पीएचडी के शोधार्थियों को तीन साल में ही मिल सकेगी उपाधि

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गोरखपुर। सत्र 2022-23 के पार्ट टाइम पीएचडी के शोधार्थियों को तीन साल में ही उपाधि मिल सकेगी। इस प्रस्ताव को दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में विद्या परिषद की सोमवार को होने वाली बैठक में मंजूरी मिलने की उम्मीद है। विद्या परिषद कई अन्य प्रस्तावों को भी हरी झंडी दे सकती है। बैठक को लेकर एजेंडा जारी कर दिया गया है।
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शोध अध्यादेश-2021 के तहत सत्र 2022-23 के पार्ट टाइम पीएचडी के शोधार्थियों के लिए न्यूनतम आवासीय अवधि चार वर्ष कर दी गई थी। यूजीसी की ओर से किसी भी मोड में पीएचडी की न्यूनतम अवधि तीन वर्ष रखे जाने को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इसे लेकर डीडीयू प्रशासन ने अपने शोध अध्यादेश में बदलाव किया है। सत्र 2022-23 के पार्ट टाइम पीएचडी के शोधार्थियों के हित में इसे लागू किए जाने का प्रस्ताव विद्या परिषद में रखा जाएगा।
मंजूरी के बाद सत्र 2022-23 के पार्ट टाइम पीएचडी के शोधार्थी भी अपनी पीएचडी तीन साल में ही पूरी कर सकेंगे। इसके अलावा चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (सीए) के सर्टिफिकेट को पीजी के समकक्ष मान्यता दिए जाने के प्रस्ताव को भी विद्या परिषद में रखा जाएगाा। इस प्रस्ताव को मंजूरी मिली तो सीए अब कॉमर्स व प्रबंधन जैसे विषयों में पीएचडी में प्रवेश के लिए अर्ह होंगे। बैठक में तीन नए कोर्स क्रमश: पुरातत्व एवं संग्रहालय विज्ञान में पीजी डिप्लोमा, पुस्तकालय विज्ञान एवं फॉरेंसिक विज्ञान में एमएससी के संचालन को भी मंजूरी मिलने की उम्मीद है।
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बोलीं कुलपति
इस संबंध में कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि विद्या परिषद की बैठक एक जून को होगी। एजेंडे में शामिल प्रस्तावों को बैठक में रखा जाएगा। परिषद की मंजूरी मिलने पर नए पाठ्यक्रम सत्र 2026-27 से ही शुरू किए जाने की योजना है।
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