फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Gorakhpur News: डीडीयू के छात्र फिल्मों के जरिये सीखेंगे साहित्य का ज्ञान

Wed, 17 Jul 2024 04:34 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
विज्ञापन
विज्ञापन
हैदर, देवदास, मिडनाइट्स फिल्मों के बारे में पढ़ेंगे पीजी के छात्र
विज्ञापन

अंग्रेजी विभाग में पीजी के पाठ्यक्रम में जोड़ा गया फिल्मों को
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। गोरखपुर विश्वविद्यालय के छात्र फिल्मों के माध्यम से साहित्य का ज्ञान सीखेंगे। विश्वविद्यालय इस सत्र से शुरू हो रहे नए पाठ्यक्रम में परास्नातक में फिल्मों के माध्यम से साहित्य की कड़ियों को जोड़ने जा रहा है। अंग्रेजी विभाग द्वारा तैयार किए गए पाठ्यक्रम में उपन्यास और नाटक पर आधारित फिल्मों को पाठ्यक्रम में जोड़ा गया है।
नई शिक्षा नीति के तरह पाठ्यक्रम को छात्रों के लिए लचीला और रोचक बनाने पर जोर दिया गया है। पाठ्यक्रम को फिल्मों के अध्ययन से छात्र साहित्य को और भी गहराई से समझ सकेंगे। परास्नातक में अंग्रेजी के पाठ्यक्रम में चतुर्थ सेमेस्टर में कल्चर और फिल्म स्टडीज के तहत फिल्मों को जोड़ा गया है।
विज्ञापन

विशाल भारद्वाज के निर्देशन में शेक्सपीयर के हेलमेट पर बनी फिल्म हैदर और बिमल रॉय व संजय लीला भंसाली के निर्देशन में बनी फिल्म देवदास, मीरा नायर की मिडनाइट्स चिल्ड्रेन, डेविड जोंस की बैट्रल, चैस प्लेयर फिल्मों को जोड़ा गया है। फिल्मों में साहित्य को बारीकियों से दर्शाया जाता है। फिल्में सभ्यता और संस्कृति को समझने के रोचक माध्यम है।
फिल्मों के संवाद, वेषभूषा, ग्राफिक्स, संगीत साहित्य के सौंदर्य को दर्शाते है। छात्रों को फिल्मों के माध्यम से साहित्य को समझने और उन्हें मौजूद भावों को आत्मसात करने के उद्देश्य से फिल्मों को पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। फिल्मों की विभिन्न शैली कॉमेडी, बायोपिक्स, सस्पेंस, थ्रिलर, रोमांस, महाकाव्य, संगीतमय, हॉरर, एक्शन के साथ एडवेंचर का अध्ययन भी पाठ्यक्रम के अंतर्गत जोड़ा गया है। स्मार्ट क्लासेस के माध्यम से छात्र फिल्मों को देखकर उसके बारे में समझेंगे। इससे छात्र फिल्मों के बहुआयामी स्वरूप के माध्यम से साहित्य की गहराइयों को समझ सकेंगे।
विज्ञापन

पाठ्यक्रम में फिल्मों को शामिल करने का उद्देश्य छात्रों को फिल्मों के माध्यम से साहित्य के सौंदर्य और विशेषताओं से अवगत कराना है। युवा पीढ़ी फिल्मों में विशेष तौर से रुचि लेती है। फिल्मों को पाठ्यक्रम में शामिल करने से साहित्य के भावाें को समझना और व्यक्त करना आसान हो जाएगा।
- प्रो. अजय शुक्ला, विभागाध्यक्ष अंग्रेजी विभाग
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें