बेटी! मुझे कुछ नहीं होगा, तुम लोग रो मत
गोरखपुर। गोली लगने के बाद जमीन पर तड़प रहे राजेश्वर की आखिरी सांस चल रही थी पर उनका जज्बा जिंदा था। बेटी! मुझे कुछ नहीं होगा। तुम लोग रो क्यों रहे हो। अस्पताल ले चलो, सब ठीक हो जाएगा...। यह बोल अधिवक्ता राजेश्वर पांडेय की जिंदगी के आखिरी शब्द थे। इसके बाद उन्होंने आखिरी सांस लीं और सब कुछ खत्म हो गया। फिर क्या घर में कोहराम मच गया। बेटी हो या घरवाले सभी की चीख सुन मानों कलेजा बाहर आ जाएगा। बेटी का हाथ पीला करने का पिता का सपना अधूरा रह गया।
गगहा क्षेत्र के शिवपुर गांव के इस परिवार में यह हत्या पहली बार नहीं हुआ है। कुछ ऐसा ही 1992 में भी हुआ था। तब राजेश्वर पांडेय के पिता सदानंद पांडेय को गोली मारी गई थी। आरोप आज चंकी पांडेय पर है तब उसके पिता महेश्वर पांडेय पर था। आरोप था कि महेश्वर ने अपने साथियों संग सदानंद को गोली मारी थी। सदानंद छह महीने तक अस्पताल में जिंदगी मौत से जंग लड़े और फिर मौत हो गई। परिवार इसके बाद से ही महेश्वर के परिवार से अलग हो गया था लेकिन घर आसपास होने की जगह से एक बार फिर खूनी संघर्ष हो गया और राजेश्वर की जान चली गई।