लॉकडाउन में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने सहूलियत दी है। विभाग ने यूएएन से आधार कार्ड को केवाईसी के रुप में लिंक किए जाने की प्रक्रिया को अब सरल कर दिया है। अब भविष्य निधि के दस्तावेजों एवं आधार कार्ड में दर्ज जन्मतिथि में यदि तीन वर्ष तक का अंतर होगा, तो इस स्थिति में आधार कार्ड को वैध प्रमाणपत्र मानते हुए जन्मतिथि की गलती को ठीक कर दिया जाएगा।
क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त मनीष मणि ने बताया कि पहले आधार कार्ड को साक्ष्य मानते हुए जन्मतिथि में सिर्फ एक साल तक के अंतर में सुधार किया जाता था। इससे अधिक का अंतर होने पर खाताधारक का मेडिकल कराने के साथ ही एफिडेविट के साथ ही अन्य दस्तावेज मांगे जाते थे, लेकिन कोरोना महामारी को ध्यान में रखते हुए इस प्रक्रिया को सरल बनाया गया है।
उन्होंने बताया कि ऐसे सभी सदस्य जिनके दस्तावेजों और आधार कार्ड पर दर्ज जन्मतिथि में तीन वर्ष से कम का अंतर है, वे सुधार के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। ऑनलाइन आवेदन प्रस्तुत किए जाने से ईपीएफओ को यूआइडीएएआई के माध्यम से जन्मतिथि को तत्काल सत्यापित करने में सहायता मिलेगी और आवेदनों का त्वरित निस्तारण हो सकेगा।
पीएफ की धनराशि के लिए ऑनलाइन करें आवेदन
क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त मनीष मणि ने बताया कि कोरोना महामारी के दौरान अपनी वित्तीय आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए खाताधारक अपने पीएफ खाते में जमा राशि प्राप्त करने के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इस संबंध में कार्यालय के समस्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे खाताधारकों के ऑनलाइन दावों का त्वरित निस्तारण करें।