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इसे कहते हैं ऊंट के मुंह में जीरा: इतना महंगा कि छौंका भी मुश्किल, बारिश और तस्करी के चलते आई तेजी

Tue, 08 Aug 2023 03:03 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी गोरखपुर।

सार

शारतपुर की अलका का कहना है कि सब्जियों ने पहले ही किचेन का बजट बिगाड़ रखा था और अब मसालों ने महंगाई का तड़का लगा दिया है। महंगाई पर कोई नियंत्रण नहीं है। आम जनता परेशान हो रही है।
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गोरखपुर समाचार - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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ऊंट के मुंह में जीरा वाली कहावत इस वक्त एकदम आम लोगों पर लागू है। जीरा इतना महंगा हो गया हैकि लोगों के लिए मुंह में जीरा जैसी स्थिति है। पहले सब्जियों से टमाटर गायब हो गया तो अब बिना छौंके वाली दाल खाने की आदत भी अब डाल लीजिए। मसालों का राजा कहे जाने वाले जीरे के दाम में तीन गुना से ज्यादा उछाल आया है।

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जो जीरा तीन महीने पहले तक 250 रुपये किलो बिकता था, अब 850 रुपये बिक रहा है। इसी तरह हल्दी, मेथी, अजवाइन, राई, हल्दी पाउडर, नमक व सौंफ के दामों में तेजी आई है। इसकी वजह बारिश और तस्करी बताई जा रही है।

थोक किराना व्यापारी रोहित अग्रवाल के मुताबिक, मसालों के दाम में वृद्धि की वजह बेमौसम बारिश, पैदावार कम होना और मांग की तुलना में आपूर्ति कम, है। सबसे ज्यादा जीरा के भाव बढ़े हैं। जो जीरा मई में 250 से 300 रुपये किलो के बीच बिके थे, वह अब 800 से 850 रुपये किलो के बीच बिक रहा है। इसी तरह पिछले महीने हल्दी 70 से 80 रुपये किलो के बीच बिकी थी।
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इस महीने यह 150 से 160 रुपये किलो के बीच बिक रही है। सौंफ, अजवाइन, काली मिर्च, छोटी इलाइची, बड़ी इलाइची के दाम में भी 200 से 300 रुपये किलो तक वृद्धि हुई है। अभी कुछ दिनों तक मसालों के दामों में तेजी बनी रहेगी।

 

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बिगड़ा किचेन का बजट

बशारतपुर की अलका का कहना है कि मसालों के दाम बढ़ने से किचन का बजट गड़बड़ा गया है। सब्जियों ने पहले ही किचेन का बजट बिगाड़ रखा था और अब मसालों ने महंगाई का तड़का लगा दिया है। महंगाई पर कोई नियंत्रण नहीं है। आम जनता परेशान हो रही है।

मसालों के भाव
नाम पहले अब
जीरा 240 850
मेथी 120 180
मोटा सौंफ 280 550
अजवाइन 360 460
हल्दी पाउडर 70 150
लाल मिर्चा 300 400
काली मिर्च 450 750


नोट: मूल्य रुपये प्रति किलो है।


 
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