गोरखपुर महोत्सव के तहत आयोजित शिल्प मेला में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के दौरान लुप्त हो रही सांस्कृतिक विरासत पंवरिया नृत्य को जीवंत किया गया। गगहा क्षेत्र के मुस्लिम पंवरिया जाति के लोग ही इस परंपरा के वाहक हैं।
शिल्प मेला में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के संयोजक हरि प्रसाद सिंह ने बताया कि हिंदू परिवारों में बेटे के पैदा होने पर पंवरिया जाति के लोग घर में बधाई गीत गाकर नेग के रूप में धन और खाद्य सामग्री मांग कर गुजारा करते थे।
किन्नरों के कारण धीरे धीरे यह परंपरा समाप्त होती जा रही थी। गगहा इलाके में पंवरिया जाति के चंद परिवार ही बचे हैं। इस परंपरा को जीवंत करने के प्रयास के तहत मंच पर नृत्य का प्रस्तुतिकरण किया गया। लोक कलाकार अनीश उर्फ फेंकू पंवरिया ने बधाई गीत और जासोरानी की कहानी, गीत व नृत्य के रूप में प्रस्तुत की। पंवरिया नृत्य देख कर दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए।
शिल्प मेले के सांस्कृतिक मंच पर प्रांजल श्रीवास्तव ने भरतनाट्यम प्रस्तुत किया। उन्होंने शास्त्रीय नृत्य की भाव भंगिमाओं से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कलाकारों को पर्यटन विभाग के डॉ. शरद मणि त्रिपाठी, विवेक, मनीष और हरि प्रसाद सिंह ने स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया।