श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का जलाभिषेक कर बेलपत्र, धतूरा, फूल, दूध और गंगाजल अर्पित किया। नागपंचमी के अवसर पर नाग देवता की पूजा कर परिवार की सुख-समृद्धि और संतान की मंगलकामना भी की गई। सावन के सोमवार को लेकर रविवार शाम से ही शिवालयों में तैयारियां पूरी कर ली गई थीं।
शहर के प्रमुख शिव मंदिरों में सोमवार सुबह से श्रद्धालुओं की कतार लग गई। महिलाएं और पुरुष हाथों में पूजा की थाली और जल लेकर अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए। कई श्रद्धालु नंगे पैर मंदिर पहुंचे और भगवान शिव का अभिषेक किया।
सावन सोमवार पर भगवान शिव को जल चढ़ाने के लिए कांवड़ियों के जत्थे भी पिपराइच मोटेश्वर नाथ पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक किया।
नागपंचमी पर शिवालयों में पूजा
सावन सोमवार के साथ नागपंचमी होने से मंदिरों में पूजा का विशेष महत्व रहा। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव के साथ नाग देवता का पूजन किया। कई मंदिरों में नाग देवता को दूध अर्पित करने और शिवलिंग पर जल चढ़ाने के लिए अलग व्यवस्था की गई। पुरोहितों ने श्रद्धालुओं को नागपंचमी के महत्व की जानकारी देते हुए भगवान शिव और नाग देवता की पूजा-अर्चना कराई।