गोरखपुर जिले में लगातार बढ़ रही आपराधिक वारदात के पीछे मातहत पुलिस का रवैया भी कम जिम्मेदार नहीं है। अधिकतर गंभीर मामलों में भी पुलिस फरियादियों को टरका कर रफा-दफा करने की कोशिश में लगी रहती है। ऐसे में बदमाश बेखौफ हो जाते हैं और लगातार वारदात करते रहते हैं। जब मामला अफसरों के संज्ञान में आता है, तो पुलिस सक्रिय होती है, लेकिन तब तक बदमाश पकड़ से दूर हो चुके होते हैं। हद तो यह है कि अफसर लगातार सचेत कर रहे हैं, लेकिन मातहतों का रवैया नहीं सुधर रहा है।
केस एक
20 जनवरी 2021 को महराजगंज के दो स्वर्ण व्यापारियों को अगवा कर नौसड़ के पास 19 लाख नकद और 11 लाख रुपये के जेवरात लूट लिए गए थे। पीड़ित जब चौकी पहुंचे तो पुलिस ने घटना को फर्जी बता दिया। किसी तरह से व्यापारियों ने एसएसपी से संपर्क किया, तब पुलिस सक्रिय हुई। 24 घंटे में बस्ती में तैनात दरोगा, सिपाही दबोच लिए गए, जिन्होंने लूट की थी। इस मामले में चौकी इंचार्ज पर कार्रवाई भी हुई।
केस दो
31 दिसंबर 2020 की रात शाहपुर के खजांची चौक के पास व्यापारी सुशील के साथ भी गहने की लूट हुई थी। जब बस्ती के पुलिस वाले पकड़े गए तो यह मामला भी खुल गया। उसी दिन शाहपुर पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज किया था। इससे पहले पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और जांच के आधार पर मामले को फर्जी साबित कर दिया था। इस मामले में कोई भी केस पहले नहीं दर्ज किया गया था। जिस वजह से दूसरी वारदात 20 जनवरी को हो गई थी।
केस तीन
2 मार्च 2021 पांडेयहाता में अमृतसर के व्यापारी सुरेंद्र सिंह के साथ 45 लाख के गहने की लूट हुई। व्यापारी ने लूट की सूचना तत्काल पुलिस चौकी जाकर दी। पुलिस ने कार्रवाई कर बदमाश को दबोचने की जगह उलटे व्यापारी से ही बदसलूकी की और उन्हें चौकी से भगा दिया। जब एक राहगीर ने एसएसपी को सूचना दी, तब पुलिस मौके पर पहुंची और जांच पड़ताल में सीसी टीवी फुटेज से साबित हो गया है कि वारदात हुई है।
केस चार
2 मार्च 2021 की रात में एक युवती ने हड़हवा फाटक पुलिस चौकी पहुंचकर शिकायत की कि उसके साथ कुछ युवकों ने गलत हरकत की है। एसएसपी को अगले दिन 3 मार्च को मामले की जानकारी हुई तब पुलिस सक्रिय हुई। पुलिस ने अफसरों को बताया कि युवती नशे में थी, लेकिन उस रात उसका मेडिकल नहीं कराया गया। इसकी वजह से पुलिस को जांच में मुश्किलें आ सकती हैं।
एसएसपी जोगेंद्र कुमार ने बताया कि पुलिस की प्राथमिकता पीड़ित को न्याय देना होता है। जैसे ही मामला संज्ञान में आता है, कार्रवाई की जाती है। जहां कहीं पुलिस वालों की लापरवाही सामने आती है, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाती है। कोशिश यही रहती है कि पुलिस त्वरित कार्रवाई करें।