गोरखपुर में आईएसआई के एक जासूस को एटीएस ने सोमवार को गिरफ्तार किया था। उसका नाम हनीफ है। यह मामला सामने आते ही लोगों को 22 मई 2007 को शहर में हुए सीरियल ब्लास्ट की घटना याद आ गई।
इसकी साजिश आइएम आतंकी संगठन ने रची थी। इस घटना में छह लोग घायल हुए थे। पुलिस ने आईएम से जुड़े तीन युवकों को गिरफ्तार किया था। हालांकि ब्लास्ट की साजिश रचने वालों के स्थानीय मददगारों का अभी तक पता नहीं चल पाया।
बताया जाता है कि 22 मई 2007 की शाम को गोलघर में जलकल गेट के सामने ट्रांसफार्मर के पास पहला ब्लास्ट हुआ। हालांकि धमाका कम आवाज वाला था, लेकिन आसपास अफरा-तफरी मच गई। अभी लोग कुछ समझ पाते की बलदेव प्लाजा के सामने पेट्रोल पंप के पास और गणेश चौराहे के पास ट्रांसफार्मर के पास पांच-पांच मिनट के अंतराल पर विस्फोट हुआ। गणेश चौराहे के पास हुए ब्लास्ट में छह लोग मामूली रूप से घायल हुए थे।
इसे भी पढ़ें- पकड़े जाने से पहले मोबाइल कर दिया फॉर्मेट, पाकिस्तान में इस्तेमाल होने लगा था हनीफ का नंबर
पुलिस ने जब छानबीन की तो पता चला कि तीनों स्थानों पर साइकिल में लटका कर रखे गए टिफिन में विस्फोटक हुआ था। किसी गड़बड़ी की वजह से विस्फोटक उतना प्रभावी नहीं हुआ। कुठ ही दिनों में पुलिस ने सिद्धार्थनगर जिले के नेपाल सीमा से एक और बाराबंकी से दो युवकों को गिरफ्तार किया था। तीनों का संबंध पुलिस ने पाकिस्तान समर्थित खुफिया एजेंसी से होने का दावा किया था।
जांच में ये भी पता चला कि विस्फोटक रखने के लिए साइकिलों की खरीदारी रेती रोड पर स्थित दो दुकानों से की गई थी। पुलिस का दवा था कि इसमें स्थानीय लोगों का भी हाथ लेकिन उनकी गिरफ्तारी आजतक नहीं हो पाई।