पुलिस को पूछताछ में चिलुआताल, उतरासोत निवासी रामविशाल ने बताया कि वह 2015 से बैंक में संविदा पर चपरासी है। बैंक के सभी अधिकारी और कर्मचारी उसपर भरोसा करते थे। इसलिए बैंक के लॉकर, सेफ सहित अन्य चाबियां उसे खोलने और बंद करने के लिए दे देते थे। लॉकर खोलते समय जेवर और नकदी देखकर लालच आ गया। तब उसने अपने दोस्त तिवारीपुर के मंझरिया निवासी अजय कुमार और उसके भाई शेरू के साथ मिलकर चोरी की साजिश रची।
जनता का लॉकर छुआ नहीं, बैंक का लॉकर खोला था
एसपी सिटी ने बताया कि चोरी करने के तौर तरीके से किसी कर्मचारी के शामिल होने का संदेह हो गया था। चोरी के दौरान बैंक के लॉकर से ही जेवर निकाला गया था। जनता के लॉकर को बिल्कुल छुआ नहीं गया। जांच में पता चला कि रामविशाल ही अक्सर बैंक में ताला बंद करता था। सोमवार की सुबह वह सबसे पहले पहुंचा। चोरी के बाद अपने साथियों की मदद से नकदी और गहने ठिकाने लगा दिया।
बैंक मैनेजर ने दो अफसरों पर जताई थी आशंका
बैंक मैनेजर की ओर से कोतवाली थाने में तहरीर में हेड कैशियर समेत दो लोगों पर चोरी में शामिल होने की आशंका जताई गई थी। एसपी सिटी ने बताया कि अब यह मुकदमा खत्म किया जाएगा।
इलाहाबाद बैंक शाखा में चोरी का पर्दाफाश करने के साथ ही पुलिस ने बैंक अफसरों की बड़ी लापरवाही भी पकड़ी है। जांच में पता चला कि बैंक के लॉकर तक की चाबी ठेका चपरासी के हाथों में थी, जिस वजह से वारदात हुई है। इस तरह की लापरवाही को रोकने के लिए अब पुलिस बैंकों के आला अफसरों को पत्र लिखेगी।
एसपी सिटी डॉ. कौस्तुभ ने बताया कि चपरासी ने वारदात से पहले भरोसा जीता था। काफी समय तक बैंक में होने की वजह से हर कोई उसपर भरोसा करता था और लॉकर तक की चाबी उसके पास मौजूद थी। यही वजह थी कि आसानी से उसने वारदात को अंजाम दे दिया।
एसपी सिटी ने बताया कि इस लापरवाही को लेकर पुलिस की ओर से बैंक के आला अफसरों को पत्र लिखा जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि पुलिस ड्यूटी में भी सीसीटीवी कैमरा खराब होने की बात पहले ही सामने आई थी और इसकी जानकारी शाखा प्रबंधक को दी गई थी लेकिन उसे ठीक नहीं कराया गया था।