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गोरखपुर: इलाहाबाद बैंक में चपरासी ने रची थी चोरी की साजिश, 16 ताले के अंदर से उड़ाई थी नगदी

Wed, 01 Jan 2020 02:24 PM IST
विजय जैन डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
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- फोटो : अमर उजाला
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गोरखपुर में कोतवाली इलाके के चरनलाल चौक स्थित इलाहाबाद बैंक में हुई चोरी का 24 घंटे में ही पुलिस ने पर्दाफाश कर दिया है। पुलिस ने तीन आरोपियों को  गिरफ्तार कर लिया है। बैंक के चपरासी रामविशाल ने अपने दो दोस्तों अजय कुमार और रंजित निषाद के साथ मिलकर चोरी की साजिश रची थी। पुलिस ने चोरी की रकम और गहने बरामद कर लिए हैं।

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बीते शुक्रवार को बैंक बंद होने के दौरान ही रामविशाल ने तालों को बंद नहीं किया। फिर सोमवार की सुबह डिप्टी मैनेजर से चाबी लेकर मुख्य दरवाजा खोला और खुले लॉकर से रुपये और गिरवी रखे गए गहने निकालकर दोस्तों को बुला लिया। दोस्तों को रकम, गहने देने के बाद उसने प्रबंधक को चोरी की सूचना दे दी। इसके बाद पहुंची पुलिस को जांच के दौरान शक हो गया था क्योंकि 16 में से एक भी ताला टूटा नहीं था। बचने के लिए सीसीटीवी कैमरे का डीबीआर भी निकाल लिया गया था, पुलिस ने उसे भी बरामद कर लिया है।

पुलिस लाइंस में एसपी सिटी डॉ. कौस्तुभ, सीओ प्रवीण सिंह ने संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस में घटना का पर्दाफाश किया। एसपी ने बताया कि सोमवार की सुबह करीब साढ़े 10 बजे बैंक में चोरी की सूचना पुलिस को मिली। 16 ताले खोलकर बैंक के लॉकर में रखे 20 लाख रुपये के गहने और तीन लाख 61 हजार रुपये नकद की चोरी की जानकारी मिली। पुलिस ने जांच-पड़ताल की तो यह साफ हो गया कि इसमें कोई ना कोई बैंक कर्मचारी ही शामिल है। शक के आधार पर पुलिस ने बैंक कर्मचारियों से पूछताछ शुरू की तो सभी ने अलग-अलग बयान दिए।
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पुलिस अफसरों ने बताया कि पूछताछ के दौरान रामविशाल पर पुलिस को शक हो गया था। फिर उसे छोड़ दिया गया था। रात में पुलिस को सूचना मिली कि तीन लोग एक बाइक पर जा रहे थे। पुलिस ने जांच के दौरान तरंग क्रॉसिंग के पास से तीनों को पकड़ा जिसमें रामविशाल सबसे पीछे बैग लेकर बैठा था।

वर्ष 2015 में संविदा पर की थी ज्वाइनिंग

पुलिस को पूछताछ में चिलुआताल, उतरासोत निवासी रामविशाल ने बताया कि वह 2015 से बैंक में संविदा पर चपरासी है। बैंक के सभी अधिकारी और कर्मचारी उसपर भरोसा करते थे। इसलिए बैंक के लॉकर, सेफ  सहित अन्य चाबियां उसे खोलने और बंद करने के लिए दे देते थे। लॉकर खोलते समय जेवर और नकदी देखकर लालच आ गया। तब उसने अपने दोस्त तिवारीपुर के मंझरिया निवासी अजय कुमार और उसके भाई शेरू के साथ मिलकर चोरी की साजिश रची।

जनता का लॉकर छुआ नहीं, बैंक का लॉकर खोला था
एसपी सिटी ने बताया कि चोरी करने के तौर तरीके से किसी कर्मचारी के शामिल होने का संदेह हो गया था। चोरी के दौरान बैंक के लॉकर से ही जेवर निकाला गया था। जनता के लॉकर को बिल्कुल छुआ नहीं गया। जांच में पता चला कि रामविशाल ही अक्सर बैंक में ताला बंद करता था। सोमवार की सुबह वह सबसे पहले पहुंचा। चोरी के बाद अपने साथियों की मदद से नकदी और गहने ठिकाने लगा दिया।

बैंक मैनेजर ने दो अफसरों पर जताई थी आशंका
बैंक मैनेजर की ओर से कोतवाली थाने में तहरीर में हेड कैशियर समेत दो लोगों पर चोरी में शामिल होने की आशंका जताई गई थी। एसपी सिटी ने बताया कि अब यह मुकदमा खत्म किया जाएगा।
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ठेका चपरासी के हाथों में थी लॉकर की चाबी

इलाहाबाद बैंक शाखा में चोरी का पर्दाफाश करने के साथ ही पुलिस ने बैंक अफसरों की बड़ी लापरवाही भी पकड़ी है। जांच में पता चला कि बैंक के लॉकर तक की चाबी ठेका चपरासी के हाथों में थी, जिस वजह से वारदात हुई है। इस तरह की लापरवाही को रोकने के लिए अब पुलिस बैंकों के आला अफसरों को पत्र लिखेगी।

एसपी सिटी डॉ. कौस्तुभ ने बताया कि चपरासी ने वारदात से पहले भरोसा जीता था। काफी समय तक बैंक में होने की वजह से हर कोई उसपर भरोसा करता था और लॉकर तक की चाबी उसके पास मौजूद थी। यही वजह थी कि आसानी से उसने वारदात को अंजाम दे दिया।

एसपी सिटी ने बताया कि इस लापरवाही को लेकर पुलिस की ओर से बैंक के आला अफसरों को पत्र लिखा जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि पुलिस ड्यूटी में भी सीसीटीवी कैमरा खराब होने की बात पहले ही सामने आई थी और इसकी जानकारी शाखा प्रबंधक को दी गई थी लेकिन उसे ठीक नहीं कराया गया था।
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