आठ अगस्त को कलवारी थाने के निवासी रामकिशोर शुक्ल ने शिकायत की थी। इसमें उन्होंने कहा कि एक वेबसाइट पर उन्होंने पुराना ट्रैक्टर का ऑनलाइन विज्ञापन देखा। दिए मोबाइल नंबर पर संपर्क करने के बाद उधर से एक व्यक्ति ने बातचीत की और व्हाट्सएप के माध्यम से ट्रैक्टर के कागजात व योगेश सिंह के नाम का आधार कार्ड भेजा। वाहन आर्मी ट्रांस्पोर्ट के माध्यम से घर पहुंचाने को कहा गया।
इस खर्च के एवज में 02 अगस्त से 03 अगस्त के बीच डेढ़ लाख रुपये पेटीएम से जमा कराए गए। रकम देने के बाद में नंबर बंद आने लगा। बकौल एसपी मुकदमा दर्ज कर साइबर सेल की टीम ने खोजबीन शुरू की। मोबाइल नंबर और एकाउंट के माध्यम से पुलिस ठगों तक पहुंच गई।
आर्मी के नाम का उठाते थे फायदा
आर्मी ट्रांसपोर्ट से वाहन भेजने का झांसा देकर जालसाज अपने पेटीएम खाते में रकम मंगा लेते थे। एक वर्ष में चारों के जरिए दो करोड़ तीस लाख रुपये के हेरफेर के साक्ष्य मिले हैं। पकड़े गए चारों साइबर ठगों के खातों को पुलिस ने फ्रीज करा दिया है।
साइबर क्राइम का गढ़ माने जाने वाले झारखंड के जामताड़ा गांव की तरह राजस्थान का कल्यानपुर गांव काफी चर्चा में है। एसपी ने बताया कि कई प्रांतों की पुलिस वहां लगातार दबिश देकर गिरफ्तारी कर रही है। अभियुक्तों ने पुलिस को पूछताछ में बताया कि वे ऑनलाइन विज्ञापन के माध्यम से पुराने वाहनों को काफी कम कीमत पर बेचने का झांसा देकर भोले-भाले लोगों को फंसाते थे। विश्वास में लेकर उनसे गाड़ियों को आर्मी ट्रांसपोर्ट के माध्यम से उनके घर पहुंचाने का वादा करते थे।
इस टीम ने की गिरफ्तारी
थानाध्यक्ष कलवारी विंदेश्वरी मणि त्रिपाठी, प्रभारी स्वाट टीम राजकुमार पांडेय, प्रभारी सर्विलांस सेल जितेंद्र सिंह, कांस्टेबल राकेश कुमार यादव, बलराम यादव के अलावा स्वाट टीम के मनोज राय, मनिन्द्र प्रताप चन्द, देवेंद्र निषाद, रविशंकर शाह, अभिषेक तिवारी, सर्विलांस सेल के जनार्दन प्रजापति, जितेन्द्र यादव और साइबर सेल के कांस्टेबल धीरेन्द्र कुमार यादव, मोहन यादव, अभिषेक कुमार त्रिपाठी ने आरोपियों की गिरफ्तारी और जांच में अहम भूमिका निभाई।