महिला ने तीन बच्चों के साथ की आत्महत्या।(इनसेट में पति पत्नि)
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गोरखपुर के उनौला रेलवे स्टेशन के पास ट्रेन के आगे कूदकर तीन बेटियों के साथ खुदकुशी करने का मामला जिले में पहला नहीं है। पति-पत्नी के झगड़े में इसके पहले भी बच्चों की जिंदगी गई हैं और मां के मरने से परिवार उजड़ चुके हैं।
केस 1
7 सितंबर 2017 को शाहपुर इलाके के शक्तिनगर में सुभाष प्रजापति की पत्नी शोभा ने तीन बच्चों एंजिल (10), अथर्व (8) व आराध्या (5) के साथ खुदकुशी करने का फैसला किया था। तीन फंदे तैयार कर सभी को लटका भी दिया था मगर दो बच्चे शोर मचाने लगे थे। इसके पहले शोभा ने अपनी बहन से बात की थी, उसने इसकी सूचना पहले ही पुलिस को दे दी थी। इस वजह से दो बच्चों को बचा लिया गया था लेकिन बड़ी बेटी और शोभा की मौत हो गई थी।
केस 2
18 मई 2018 को कैंट इलाके के महादेव झारखंडी में नलकूप विभाग के कर्मचारी सुरेश सिंह की बहू शशि सिंह ने बेटी दीक्षा उर्फ एंजल (8) और नवेध्य (4) की हत्या कर खुद फंदे से लटक गई थी। इस घटना के चार साल पहले पति संतोष ने भी पारिवारिक कलह में फंदे से लटक कर खुदकुशी की थी। एक कमरे में तीन शव देखकर आसपास के लोग भी हैरान हो गए थे।
शक और शराब ने खत्म की जिंदगी
पिपराइच क्षेत्र में तीन मासूमों के साथ मां ने जिस तरह से खुदकुशी की है उसने पूरे गांव को सदमे में डाल दिया है। सभी इस घटना से गमगीन हैं तो कोई उसके दस साल पुराने प्रेम विवाह के फैसले पर सवाल खड़ा कर रहा है, वहीं कोई वर्तमान में उठाए गए आत्मघाती कदम पर।
खैर, चर्चाएं चाहे जो हो मगर झगड़े ने एक पूरे परिवार को बिखेर दिया। तीन बच्चे किस कदम से ट्रेन के आगे कूदे होंगे यह सोचकर किसी की भी रूह कांप जाएगी।
जानकारी के मुताबिक, बेटियों संग खुदकुशी करने वाली पूजा ने दस साल पहले समाज, घर सबसे बगावत करके अजय के साथ शादी की थी। गांव में ही शादी करने का सब लोग विरोध कर रहे थे मगर पूजा ने सबकी सोच से आगे बढ़कर अजय का हाथ थामा था।
सोचा था कि जीवन में खुशियां ही खुशियां होंगी मगर ऐसा कुछ भी नहीं हो सका। पेंट पॉलिश का काम करने वाला अजय को एक के बाद एक तीन बेटियां पैदा होने से घर में कलह शुरू हो गई। नशे के आदी अजय का पत्नी से आए दिन विवाद होता था जिससे आजिज आकर पूजा ने बेटियों के साथ खुदकुशी कर ली।
लोगों को करना चाहिए सहयोग
गोरखपुर विश्वविद्यालय के समाज शास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष मानवेंद्र सिंह ने कहा कि समाज, परिवार का सहयोग ना मिलने और सामाजिक मापदंडों के अनुसार सफलता ना मिलने पर जिंदगी में निराशा आ जाती है और फिर लोग खुदकुशी करने जैसे आत्मघाती कदम उठा लेते हैं।
बच्चों के साथ खुदकुशी करने के पीछे का मकसद होता है कि जब आदमी को लगता है कि उसका पति या परिवार साथ नहीं दे रहा है तो ऐसे में बच्चों को भी मार देता है।
क्योंकि उसके मन में यह सवाल रहता है कि मेरे न रहने पर उनका पालन कौन करेगा। सामाजिक और पारिवारिक सहयोग को मजबूत कर इस तरह की घटनाओं को रोका जा सकता है।