मामला एसएसपी जोगेंद्र कुमार के संज्ञान में आया तो उन्होंने इसकी फाइल को फिर से खोलने का आदेश दिया। क्राइम ब्रांच के निरीक्षक अजय कुमार मौर्या को विवेचना सौंपी गई और जांच आगे बढ़ी तो पता चला कि घटना वाले दिन बब्बन अपने दो दोस्तों के साथ शराब पीने गया था। बाद में दोनों दोस्तों ने बाइक पर बीच में बब्बन को बैठा लिया और फिर रास्ते में उसकी हत्या कर दी। पकड़े गए आरोपी से पूछताछ में पता चला है कि उसे यह शक रहता था कि उसकी पत्नी का अवैध संबंध बब्बन से है। इसी शक में उसने बब्बन की हत्या कर दी।
इस मामले के पर्दाफाश होने के साथ एक बात तो साफ हो गई कि जिन पुलिसवालों ने दो बार मामले में एफआर लगाई, उन्होंने तथ्यों की अनदेखी की। यह अनदेखी भी इतनी बड़ी थी कि कत्ल करने वाला बेदाग बचा जा रहा था। खैर, अब जब मामला खुल गया तो उन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ तो कार्रवाई बनती है, जिन्होंने मामले को रफादफा कर दिया था। नासमझी से हुआ तो वे पुलिस विभाग में काम करने लायक नहीं और जानबूझकर अनदेखी हुई तो जेल जाना चाहिए।