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44 महीने से रडार पर ई-टिकटिंग का सरगना हामिद, जांच एजेंसियों का सिरदर्द बने 3000 बैंक खाते

Fri, 24 Jan 2020 12:59 PM IST
विजय जैन डिजिटल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बस्ती
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डीजी अरुण कुमार, गिरोह का सरगना हामिद अशरफ। - फोटो : amarujala
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तत्काल टिकट बुकिंग में हामिद के साम्राज्य का खुलासा नई बात नहीं है, मगर उसके शातिराना पैंतरों का तोड़ न निकाल पाने की वजह से सुरक्षा एजेंसियां लगातार गच्चा खाती रही हैं। उनके लिए ताजा सिर दर्द तीन हजार बैंक खाते बने हुए हैं, जिसका ब्योरा हामिद के खास हमदर्द गुलाम मुस्तफा के जरिए हाथ लग चुका है।
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ये खाते एसबीआई की 2,400 शाखाओं और 600 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों में खोले गए हैं। शक है कि इन बैंक खातों का इस्तेमाल ई-टिकट के धंधे में लेनदेन के लिए इस्तेमाल होने के साथ ही आतंकी संगठन दंगा-फसाद व समाज विरोधी तत्वों को रकम पहुंचाने के लिए भी किया जा रहा है। यानी हामिद के साफ्टवेयर बेचने के एजेंटों के नेटवर्क का इस्तेमाल टेरर फंडिंग के लिए प्रयोग किए जाने का संदेह है।

इसके पीछे असल वजह गुलाम मुस्तफा ही है, जिसे पिछले दिनों आरपीएफ ने भुवनेश्वर में पकड़ा था। पता चला कि मुस्तफा झारखंड के एक मदरसे का पढ़ा है। उससे आईबी, स्पेशल ब्यूरो, ईडी, एनआईए, कर्नाटक पुलिस मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग मामले में लगातार पूछताछ कर रही हैं।
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अप्रैल 2016 से रडार पर हामिद

पहली और अंतिम बार 28 अप्रैल 2016 को पुरानी बस्ती थाने के दक्षिण दरवाजा के पास गिरफ्तार किया गया था। सीबीआई बेंगलुरु और मुंबई विजिलेंस की संयुक्त टीम ने पहली दफा उसी के स्टाकिस्ट शमशेर की मुखबिरी पर दबिश देकर पकड़ा था। तभी से सुरक्षा एजेंसियां उसकी गतिविधियों पर नजर रखने की कोशिश कर रही हैं।

कड़ी थी दिसंबर की गिरफ्तारी
दो दिसंबर 2019 को आरपीएफ व पुलिस की स्वाट टीम ने ई-टिकट के जिस गिरोह को यहां से पकड़ा था, वे आरोपी इसी कड़ी का हिस्सा थे। एसपी हेमराज मीणा ने प्रेसवार्ता के दौरान बताया था कि पकड़े गए टिकट दलाल काठमांडू में बैठे ई-टिकट के साफ्टवेयर के सरगना से मिलकर लौटे हैं। आरपीएफ के डीजी का खुलासा भी 2016 की गिरफ्तारी का ही हिस्सा है।
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यू-ट्यूब के जरिए साफ्टवेयर अपने एजेंटों को बेचने लगा

हामिद की जमानत के बाद उसने ब्लैक टीएस, नियो और फिर रेड मिर्ची सॉफ्टवेयर बना लिया है। उसने यू-ट्यूब के जरिए साफ्टवेयर अपने एजेंटों को बेचने लगा।

एसपी के मुताबिक पहली बार ही पकड़े जाने के कुछ दिनों बाद जमानत पर रिहा होते ही सुरक्षा एजेंसियों से बचने के लिए नेपाल के नवलपरासी जिले में रहने के बाद काठमांडू को स्थाई ठिकाना बना लिया। मौजूदा समय भी उसके काठमांडू में होने की पुष्टि हो रही है।

काम कर रही हैं टीमेंः एसपी
एसपी हेमराज मीणा का कहना है कि पिछले डेढ़ महीने से टीमें ई-टिकटिंग के रैकेट को लेकर काम कर रही हैं। कई जिले में टीमें भेजी जा चुकी हैं। चूंकि इनके नेटवर्क इतने ज्यादा हैं कि पुष्टि कराने में काफी वक्त लग रहा है। जहां तक यहां मुख्य सर्वर के लोकेशन का सवाल है,उस पर भी टीमें काम कर ही हैं। जल्द ही पुलिस बड़ा खुलासा करने में कामयाब होगी।
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