उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में अपराध का ग्राफ तेजी से बढ़ा है। बदमाश बेखौफ हैं। पिछले 20 दिन से हर तीसरे दिन हत्या की वारदात को अंजाम दिया जा रहा है। फायरिंग, चोरी, छेड़खानी, किशोरी को भगाने की घटनाओं में भी इजाफा हुआ है। एसएसपी की तमाम सख्तियों के बावजूद पुलिस बदमाशों की नकेल कसने में विफल साबित हो रही है।
बुधवार को जिस तरह से तीस लाख की लूट की घटना हुई है, उसने पुलिस की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। डीआईजी/एसएसपी जोगेंद्र कुमार मातहतों को अपराध रोकने के लिए रोज नए मंत्र दे रहे हैं, लेकिन इसका पुलिस की कार्यप्रणाली पर कोई खास असर नहीं दिख रहा। नतीजा सामने है कि आए दिन हत्या, लूट जैसी वारदातें सामने आ रही हैं।
माना जाता है कि मामलों के जल्द पर्दाफाश और पुलिस की कड़ी कार्रवाई से बदमाशों में भय पैदा होता है। वे वारदात करने से पहले सौ बार सोचते हैं, लेकिन मामलों के पर्दाफाश में पुलिस की सुस्ती से उनका दुस्साहस बढ़ जाता है।
बड़ी बात यह कि जिन घटनाओं की मानीटरिंग एसएसपी ने की, उसका पर्दाफाश हो गया, लेकिन दूसरे मामले वैसे के वैसे पड़े हैं। गोला और पिपराइच में महिला की हत्या कर फेंके गए शव का राज आज भी जांच में ही उलझा है, जबकि एसएसपी ने सीओ को इसकी मानीटरिंग सौंपी थी।