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जिला महिला अस्पताल में लगाया गया पालना: मां! मुझे जीना है... मुझे नेकी के पालने तक पहुंचा देना

Thu, 29 Sep 2022 03:25 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

एसआईसी महिला अस्पताल डॉ. एनके श्रीवास्तव ने कहा कि संस्था ने जगह देख ली है। जगह पसंद आ गई है। कुछ सामान संस्था ने उपलब्ध करा दिए हैं। बृहस्पतिवार को पालना महिला अस्पताल की नई इमारत के पास लगा दिया है।
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : सोशल मीडिया।
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विस्तार
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‘मां! हो सकता है मेरा जन्म कुछ ऐसी परिस्थितियों में हुआ हो, जिनमें मुझे साथ न रख पाना तुम्हारी मजबूरी हो। संभव है, मैं उस प्रेम का नतीजा हूं जिसे समाज मान्यता न दे रहा हो। हो सकता है मैं एक बेटी हूं, जिसे मेरे ही परिवार के लोग स्वीकार न कर रहे हों। लेकिन, जीने का हक तो मुझे भी है। तुमने मुझे नौ माह तक अपने गर्भ में पाला। मुझे जीवन देने के लिए कई संघर्ष किए, ये मुझे पता है। एक आखिरी बार और हिम्मत करना, मुझे नेकी के पालने तक पहुंचा देना।’

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कुछ ऐसा ही सोचता होगा वह नवजात जिसे जन्म के बाद ही कहीं छोड़ आने की बात की जाती होगी। कहा जाता होगा- ले जाओ, कहीं झाड़ियों में फेंक आओ इसे। झाड़ियां, जहां वह दुधमुंहा भूख-प्यास से तड़पेगा। जहां उसे कुत्ते, सांप और न जाने कौन-कौन से जानवर अपना आहार बनाने के लिए इंतजार कर रहे होंगे।

ऐसे नवजातों को जीवन मिल सके। इसके लिए महिला जिला अस्पताल के गेट पर पालना लगाया गया है। हमने इसे नेकी का पालना नाम दिया है। क्योंकि इसके पीछे की नीयत नेक है। इस पालने में कोई भी लावारिस नवजात को रख सकेगा। रखने वाले का नाम-पहचान सब कुछ गोपनीय रहेगी।
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मां भगवती विकास संस्थान, उदयपुर की तरफ से यह पालना लगाया जा रहा है। संस्था के संस्थापक योग गुरु देवेंद्र अग्रवाल ने बताया कि कोई भी महिला नवजात को इस पालने तक पहुंचा सकती है। पालने में एक मोशन सेंसर लगा है। इसमें किसी नवजात को रखने के दो मिनट बाद महिला अस्पताल की इमरजेंसी में लगा अलार्म बज उठेगा।

इससे वहां काम करने वाले डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी को नवजात के बारे में सूचना मिल जाएगी। इसके बाद नवजात का स्वास्थ्य परीक्षण कर जरूरत के हिसाब से उसका उपचार किया जाएगा। स्वस्थ होने पर उसे नजदीकी राजकीय शिशु गृह में भेज दिया जाएगा।  

महिला अस्पताल के एसआईसी डॉ. एनके श्रीवास्तव ने बताया कि यह पालना ऐसे नवजातों और दुधमुंहे बच्चों के लिए है, जिन्हें माताएं लोक-लज्जा की वजह से छोड़ देती हैं। अक्सर ऐसे नवजात झाड़ियों में मिलते हैं। कई बार जानवर इन नवजातों को नुकसान भी पहुंचा देते हैं। मां भगवती विकास संस्थान, उदयपुर के संस्थापक देवेंद्र अग्रवाल ने बताया कि ऐसे नवजातों को जिदंगी मिल सके इसी उद्देश्य के तहत यह पालना महिला अस्पताल में बनवाया जा रहा है।

एसआईसी महिला अस्पताल डॉ. एनके श्रीवास्तव ने कहा कि संस्था ने जगह देख ली है। जगह पसंद आ गई है। कुछ सामान संस्था ने उपलब्ध करा दिए हैं। बृहस्पतिवार को पालना महिला अस्पताल की नई इमारत के पास लगा दिया गया है। इसके बाद कोई भी नवजात को पालने में छोड़ सकता है। इसके लिए स्वास्थ्यकर्मियों को भी सतर्क कर दिया गया है।
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