महापौर सीताराम जायसवाल और नगर आयुक्त अविनाश सिंह ने निगरानी कमेटी के अध्यक्ष को कोराना किट दी गई। जिसमें स्प्रे मशीन, थर्मल स्कैनर, ऑक्सीमीटर, मास्क, सैनिटाइजर, ग्लब्स तथा फेस शील्ड दिया गया। निगरानी समिति के अध्यक्ष के रूप में उपसभापति ऋषिमोहन वर्मा, संजय श्रीवास्तव, अजय राय, मदन लाल अग्रहरि, जितेंद्र सैनी, संजय यादव, बब्लू प्रसाद गुप्ता, आलोक सिंह ‘विशेन’, जितेंद्र चौधरी ‘जीतू’, राधेश्याम रावत, अभिमंयू मौर्य, मनु जायसवाल, अशोक यादव, अजय ओझा (प्रतिनिधि), शहाब अंसारी, अमर नाथ यादव को कोरोना किट मिला है।
दाह संस्कार के लिए लकड़ियां हुईं महंगी
गोरखपुर में कोरोना संकट में शवों का दाह संस्कार करना महंगा होता जा रहा है। दाह संस्कार की लकड़ियों की कीमतों में तकरीबन प्रतिदिन बढ़ोतरी हो रही है। इस पर कोई नियंत्रण भी नहीं है। मार्च महीने में 600 से 650 रुपये क्विंटल बिकने वाली लकड़ी अब 850 रुपये प्रति क्विंटल बिक रही हैं। ये स्थिति तब है जब 20 दिन पहले की तुलना में कीमतों में 50 से 100 रुपये क्विंटल तक की कमी आई है।
अप्रैल महीने में प्रतिदिन कोरोना संक्रमितों को मिलाकर राजघाट के अंत्येष्टि स्थल पर 60 से 80 अधिक शवों का दाह संस्कार हो रहा था। एक शव के दाह संस्कार में तीन से चार क्विंटल लकड़ी खर्च होती है। ऐसे में लकड़ी की कीमतों में बढ़ोतरी से काफी दिक्कत हो रही है।
राप्ती तट पर लकड़ी के विक्रेता राजेश बताते हैं कि गांव में लकड़ियां मिल नहीं रही हैं। ऐसे में काफी दिक्कत हो रही है। महंगी लकड़ी मिल रही है। ऐसे में कीमतें बढ़ी हैं। गोला के मुक्ति धाम और बड़हलगंज के सरयू तट पर बने मुक्ति पथ पर भी 800 से 850 रुपये प्रति क्विंटल में लकड़ियां मिल रही हैं। यहां के लोगों का कहना है कि पिछले 45 दिन में कीमतों में 200 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई है। वहीं दाह संस्कार में लगने वाले करायल की कीमतें दो गुनी हो गई हैं। जो करायल मार्च में 100 रुपये किलो बिक रहा था, वह 200 रुपये तक पहुंच गया है।