जिला केसरी रहे पहलवान ब्रह्मानंद यादव हत्याकांड में दो महिला आरोपियों को अदालत से राहत नहीं मिली है। जिला एवं सत्र न्यायालय ने आरोपी निशा यादव और शीला देवी की अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। सत्र न्यायाधीश रणधीर सिंह ने मामले के तथ्यों और अपराध की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए दोनों को गिरफ्तारी से राहत देने से इनकार कर दिया। अभियोजन पक्ष ने चश्मदीद गवाहों और केस डायरी में दर्ज पेन ड्राइव से जुड़े साक्ष्यों के आधार पर जमानत का विरोध किया था।
आंखों में मिर्च डालकर गिराने का आरोप
आंखों में मिर्च पड़ने से ब्रह्मानंद मोटरसाइकिल समेत सड़क पर गिर पड़े। इसके बाद मामले में नामजद अन्य आरोपियों ने उन पर लाठी-डंडों और गंडासे व फरसे जैसे धारदार हथियारों से हमला कर दिया। हमले में वह गंभीर रूप से घायल हो गए। सूचना मिलने पर परिजन उन्हें यूपी-112 के पुलिस वाहन से जिला अस्पताल ले गए, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में 11 चोटों का जिक्र
अभियोजन पक्ष के अनुसार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ब्रह्मानंद के सिर समेत शरीर के विभिन्न हिस्सों पर 11 चोटें दर्ज की गई हैं। घटना के बाद वादी रामाकांत यादव की तहरीर पर खलीलाबाद कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पुलिस ने विवेचना के दौरान हत्या की साजिश और वारदात में आरोपियों की कथित भूमिका से जुड़े साक्ष्य जुटाए।
बचाव पक्ष ने रंजिश में फंसाने की दी दलील
वहीं, जिला शासकीय अधिवक्ता विशाल श्रीवास्तव ने जमानत का विरोध किया। अभियोजन पक्ष ने अपराध को गंभीर बताते हुए चश्मदीद गवाहों और केस डायरी में पेन ड्राइव से जुड़े साक्ष्यों का हवाला दिया।
अदालत ने नहीं दी अग्रिम जमानत
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सत्र न्यायालय ने मामले के तथ्यों और अपराध की प्रकृति को गंभीर मानते हुए निशा यादव और शीला देवी की अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। इसके साथ ही दोनों महिला आरोपियों को इस मामले में अग्रिम जमानत के जरिए गिरफ्तारी से राहत नहीं मिल सकी।